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‘हर घर तिरंगा’ दिख रहा है. आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत केंद्र की मोदी सरकार की ओर से पूरे देश में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत लोगों में लिंगों के द्वारा चलाया जा रहा है. आज शनिवार से ये अभियान शुरू हो गया. ओर अंत 15 अगस्त के दिन होगा.

इस मौके को ऐतिहासिक बनाने के लिए भारत में जगह-जगह सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और राज्य सरकारों द्वारा तिरंगे का वितरण भी किया जा रहा है. झारखंड में भी ये हर घर तिरंगा अभियान बड़ी ज़ोर शोर से चल रहा है.

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आम तौर पर भारत में तिरंगा प्रत्येक साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर फहराया जाता है, लेकिन इन दोनों मौकों पर तिरंगा झंडा के फहराने में अंतर है. आइए, सबसे पहले जानते हैं 'हर घर तिरंगा' अभियान के बारे में, उसके बाद स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के अंतर के बारे में जानेंगे.

'हर घर तिरंगा' अभियान क्या है? दरअसल, आजादी के 75 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में सरकार की ओर से 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को की गई है और यह 15 अगस्त तक अनवरत जारी रहेगा. सरकार के इस अभियान के तहत पूरे देश में करीब 20 करोड़ से अधिक घरों पर तिरंगा झंडा फहराया जाना है. 

 

इसके लिए देश के निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और विभागों को शामिल किया गया है. इस अभियान के शुरू होने के बाद से ही देश के विभिन्न स्थानों के घरों, दफ्तरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा झंडा लगाया गया है. भारत में 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाने के पीछे सरकार का मकसद आबादी में 'देशभक्ति की भावना' पैदा करना और भारत की आजादी में प्रमुखता से भागीदारी निभाने वाले महापुरुषों के बलिदान और कर्तव्य का बोध करना है.

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