राष्ट्र एवं राज्य स्तर पर बच्चों के लिए बहुत सारी नीतियों का निर्धारण किया गया है। उन्हीं नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए समाज के हर बच्चे को विशेषकर, जरूरतमंद बच्चे को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना ही हमारा कर्तव्य है। 

कार्यशाला का उद्देश्य यह है कि बाल संरक्षण एवं बाल अधिकार से जुड़े मुद्दों पर हम समाज को जागरूक कर सकें और बच्चों के प्रति दायित्वों का निर्वहन नीतिगत सिद्धांतों के मुताबिक कर सकें। उक्त बातें झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था की निदेशक श्रीमती राजेश्वरी बी ने राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, हेहल में आयोजित कार्यशाला में कहीं।

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प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित सड़कों पर रहने वाले घुमंतू बच्चों के लिए विशेष कार्य करने की जरूरत है, ताकि वह आम बच्चों की तरह समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें । अपने अधिकारों एवं हक को सुनिश्चित कर सकें। श्रीमती राजेश्वरी बी ने कहा कि जो बच्चे संस्थान में रह रहे हैं और जिनकी आयु 18 साल से ऊपर हो गई है, उन्हें कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए।

विदित हो कि झारखंड में करीब 2000 बच्चे संस्थान में रह रहे हैं। यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख डॉक्टर कनिका मित्रा ने कहा कि झारखंड में बाल तस्करी एक गंभीर समस्या है। 2019 से लेकर अब तक करीब 996 बच्चों को तस्करों से मुक्त कराया गया है। मुक्त कराए गए बच्चों में 410 बच्चों की उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच है। वहीं 359 ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष है। इसके अलावा मुक्त कराये गए 126 बच्चों की उम्र 10 वर्ष से भी कम है। उन्होंने कहा कि बच्चों की समस्या का आकलन पंचायत स्तर पर किया जाए।

कार्यशाला में मुख्य रूप से यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्रीमती प्रीति श्रीवास्तव, वर्ल्ड विजन से श्रीमती रेखा खलखो, बचपन बचाओ आंदोलन के श्री श्याम मलिक, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, श्री अनिल यादव सहायक निदेशक सर्ड,रांची के प्रतिनिधि एवं सी आई एन आई की श्रीमती तन्वी झा उपस्थित थीं।

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