स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती जी के संन्यास दिवस पर आज राँची में स्वामी मुक्तरथ ने आठ केंद्रों पर पाँच हजार बच्चों को सूर्यमस्कार और प्राणायाम सिखलाये।

मानवता के हित के लिये लोककल्याणार्थ स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती ११,जनवरी १९६४ को अपने गुरु परमहंस सत्यानन्द सरस्वती से दीक्षा ले संन्यास धारण किये थे।

विश्व का कीर्तिमान योग संस्थान "बिहार योग विद्यालय मुंगेर" को दुनियाँ का प्रथम योग विश्वविद्यालय के रूप में प्रतिष्ठित किये,जहाँ अनेकों राष्ट्र से विद्यार्थी योग अध्ययन करने, योग शिक्षक की उपाधि लेने के लिए मुंगेर आते हैं। योग विद्यालय को इतनी ऊंचाई तक ले जाने श्रेय स्वामी जी को जाता है।
     

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स्वामी जी के संन्यास दिवस पर आज राँची में स्वामी मुक्तरथ जी ने आठ केंद्रों पर पाँच हजार बच्चों को सूर्यमस्कार और प्राणायाम सिखलाये।

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