यूनिसेफ झारखंड ने आज झारखंड विधानसभा के कॉन्फ्रेंस हॉल में बच्चों के अनुकूल निर्वाचन क्षेत्र निर्माण को लेकर विधायकों के साथ एक परिचर्चा का आयोजन किया। श्री रवींद्र नाथ महतो, माननीय अध्यक्ष, झारखंड विधानसभा; श्री आलमगीर आलम, माननीय संसदीय कार्य एवं पंचायती राज मंत्री; जोबा मांझी, माननीय महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री; विधान सभा के 23माननीय सदस्यगण - इरफान अंसारी, कुमार जयमंगल, समरी लाल, विरंची नारायण, विनोद कुमार सिंह, संजीव सरदार, समीर मोहंती, रामचंद्र सिह, अमित कुमार मंडल, केदार हाजरा, उमाशंकर अकेला, सरफराज अहमद, दीपिका पांडेय, पूर्णिमा नीरज सिंह, अपर्णा सेन गुप्ता, प्रदीप यादव, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगारी, लंबोदर महतो, पुष्पा देवी, सबिता महतो, नारायण दास और सोना राम सिंकू सिंकू के अलावा, डॉ कनीनिका मित्र, प्रमुख, यूनिसेफ झारखंड; आस्था अलंग, संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ झारखंड तथा ओंकार नाथ त्रिपाठी, सामाजिक नीति विशेषज्ञ, यूनिसेफ झारखंड; कुमार प्रेमचंद, पेयजल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ, यूनिसेफ झारखंड; लक्ष्मी सक्सेना, पेयजल एवं स्वच्छता अधिकारी, यूनिसेफ एवं यूनिसेफ के अधिकारियों - लिजम्मा जार्ज, नवीन गुप्ता और यूनिसेफ कंसल्टेंट शिवानी श्रीवास्तव ने भी इस कार्यशाला में भाग लिया।

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सम्मेलन का उद्देश्य बाल मित्र निर्वाचन क्षेत्रों के निर्माण को लेकर माननीय विधायकों के साथ चर्चा के माध्यम से एक रोडमैप का निर्माण करना था, ताकि झारखंड में बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करके बाल मित्र समाज की स्थापना की जा सके तथा जाति, मजहब, लिंग, विकलांगता आदि के आधार पर बिना किसी भेदभाव के उनके अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही बच्चों के विकास के लिए आवश्यक सुविधाएं जैसे कि - स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं बेहतर वातावरण के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, झारखंड विधानसंभा के अध्यक्ष, श्री रवींद्र नाथ महतो, ने कहा, ‘‘निर्वाचन क्षेत्रों को बच्चों के अनुकूल बनाने की आवश्यकता है और यह पहल उस दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। बच्चों का स्वस्थ विकास न केवल उनके जीवन में आगे बढ़ने और फलने-फूलने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के समग्र कल्याण के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून, नीतियां और सेवाएं बच्चों के अनुकूल हों और बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्रतिबिंबित करता हो। हमें बच्चों और युवाओं को उन्हें प्रभावित करने वाले मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करने तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने और सशक्त बनाने की आवश्यकता है।’’

माननीय संसदीय कार्य और पंचायती राज मंत्री, श्री आलमगीर आलम ने अपने विशेष संबोधन में कहा, “ग्राम सभा और बाल सभा एक बाल-सुलभ निर्वाचन क्षेत्र की कल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं जिसके माध्यम से बच्चे अपनी आवश्यकताओं की पहचान कर सकते हैं और उसे अभिव्यक्त कर सकते हैं। ग्राम सभा को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्परता से काम करने की जरूरत है, ताकि बच्चों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समय पर समाधान किया जा सके।”

इस अवसर पर बोलते हुए, माननीय महिला, बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा मंत्री जोबा मांझी ने कहा, “बच्चों के विकास से ही राज्य और देश का भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। इसलिए, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम राज्य के बच्चों को सहभागिता का एक उपयुक्त मंच प्रदान करें, ताकि इस मंच के माध्यम से बच्चे अपनी समस्याओं की पहचान करने के साथ-साथ उन पर चर्चा कर सकें।’’

बाल-मित्र निर्वाचन क्षेत्र की अवधारणा और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख, डॉ. कनीनिका मित्र ने कहा, “बच्चों के अनुकूल समाज का निर्माण प्रत्येक युवा नागरिक को अपने निर्वाचन क्षेत्र के बारे में निर्णयों को प्रभावित करने का अधिकार और गारंटी देता है। इसके अलावा, यह युवाओं को अपनी राय व्यक्त करने; परिवार, समुदाय और सामाजिक जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेने एवं स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और आश्रय प्राप्त करने जैसी बुनियादी सेवाएं प्राप्त करने की गारंटी और आश्वासन भी देता है। इस पहल के माध्यम से बच्चे अपनी नागरिक भागीदारी और वैश्विक नागरिकता के बारे में भी सीख सकते हैं। बच्चे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ-साथ आने वाला भविष्य भी हैं, इसलिए उनकी उनकी जरूरतों एवं अधिकारों को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए।”

बाल मित्र समाज के निर्माण में विधायकों की भूमिका पर बल देते हुए डा. मित्र ने कहा, “अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बच्चों की भागीदारी को सुनिश्चित करके तथा बाल अधिकारों की रणनीति को विकसित एवं कार्यान्वित करके विधायकगण बाल-मित्र निर्वाचन क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही वे अपने क्षेत्रों में बालक/बालिका सभा के नियमित संचालन की निगरानी करने के अलावा यह भी सुनिश्चित कर सकते है कि बच्चे बाल सभा में अपनी भूमिका से अवगत एवं जागरूक हों।’’

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यूनिसेफ झारखंड की संचार विशेषज्ञ, आस्था अलंग ने बाल-मित्र निर्वाचन क्षेत्र निर्माण की पहल पर रोशनी डालते हुए कहा, “बच्चों के अनुकूल समाज निर्माण की पहल दशकों पूर्व यूनिसेफ के निर्देशन में विकसित की गई थी जिसे वर्ष 1990 से इसे दुनिया भर के कई शहरों में लागू किया गया है। यह पहल बच्चों के अधिकारों का समर्थन करती है और स्थानीय स्तर पर बाल अधिकार समझौता को बढ़ावा देती है, जिसका बच्चों के जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। बाल पंचायतों के माध्यम से पंचायतों को बाल-मित्र बनाया जा सकता है, जिसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर बच्चों की जरूरतों एवं मांगों का तत्परता से समाधान करने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान यूनिसेफ झारखंड के सामाजिक नीति विशेषज्ञ श्री ओंकार नाथ त्रिपाठी ने झारखंड में बाल-मित्र निर्वाचन क्षेत्र निर्माण को लेकर पावर प्वाइंट के माध्यम से तकनीकी प्रस्तुति दी। 

चाईबासा के दो बाल पंचायत प्रतिनिधि सिमरन पांडेय और कृष बनरा ने भी सम्मेलन में शामिल होकर अपने अनुभव साझा किए।

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