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मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी की अध्यक्षता में झारखंड के छह अति पिछड़े (आकांक्षी) जिलों खूंटी, सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, साहेबगंज और पाकुड़ में विकास योजनाओं की रूपरेखा तय की गई। मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को निर्देश दिया कि वे योजनाओं के चयन के दौरान सेवा उन्मुख योजनाओं को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरे और रोजमर्रा के जीवन में सहुलियतें हों, इस पर फोकस करें। 

बैठक में आकांक्षी जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, गरीबी उन्मूलन, सिंचाई, कृषि, रोजगार सृजन, कौशल विकास, आधारभूत संरचना आदि क्षेत्रों में पिछड़ेपन को दूर करने पर बल दिया गया। तीन वर्ष में इन जिलों को विकास के राष्ट्रीय पैमाने तक लाने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के लिए बजटीय प्रावधान भी किए गए। जिला मुख्यालय से सुदूर क्षेत्रों को जोड़ने के लिए पुल-पुलिया आदि योजनाओं को भी प्रमुखता दी गई। इन छह जिलों में से खूंटी, सिमडेगा, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम को उग्रवाद प्रभावित जिला होने के कारण विकास योजनाओं के लिए केंद्र सरकार से प्रति वर्ष 28.57 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध होगा। 

इन जिलों को विकास के राष्ट्रीय मानक तक पहुंचाने के लिए स्थानीय उत्पाद आधारित कुटीर उद्योग को विकसित करने के साथ महिला स्वंयसेवी सहायता समूहों, सखी मंडलों के स्वावलंबन एवं सुदृढ़ीकरण पर भी फोकस किया गया। निर्देश दिया गया कि बैठक में तय की गई योजनाओं का जिला स्तर पर अनुश्रवण संबंधित उपायुक्त प्रति माह करेंगे। इसमें जिला के योजना पधाधिकारी उपायुक्तों को सहयोग करेंगे। वहीं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा राज्य स्तर पर प्रति तीन माह के अंतराल पर विकास आयुक्त करेंगे। 

बैठक में विकास आयुक्त डीके तिवारी, योजना सह वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता सचिव आराधना पटनायक, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अविनाश कुमार, कल्याण सचिव हिमानी पाण्डे, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव अमिताभ कौशल और एडीजी आरके मल्लिक समेत खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और गुमला के उपायुक्त उपस्थित थे साथ ही साहेबगंज के उपायुक्त और पाकुड़ के उप विकास आयुक्त वीडियो कांफेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे।
 

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