राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनयूएसआरएल), रांची और झारखंड सरकार के राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) ने मिलकर तंबाकू के सेवन के खिलाफ एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने भाग लिया और तंबाकू से दूर रहने की शपथ ली।

*तंबाकू सेवन के खतरों पर चर्चा*

कार्यक्रम में डॉ. अश्विनी कुमार, राज्य नोडल अधिकारी (एनटीसीपी), ने बताया कि तंबाकू का सेवन कैसे लोगों को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा, "तंबाकू से न केवल कैंसर, बल्कि हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और अन्य कई घातक बीमारियाँ होती हैं। यह एक लत है जो धीरे-धीरे जानलेवा साबित होती है।"-

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*तंबाकू नियंत्रण के लिए कानून और रणनीति*

राजीव कुमार, राज्य सलाहकार (एनटीसीपी), ने तंबाकू उत्पादों के इतिहास और उनके दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि झारखंड में तंबाकू नियंत्रण के लिए नई नीतियाँ बनाई जा रही हैं और इसमें एनयूएसआरएल जैसे संस्थानों का सहयोग महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने ई-सिगरेट के बढ़ते चलन और इसके कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा की।

राज्य में प्रभावी रणनीति के लिए उन्होंने विश्वविद्लाय से सहयोग की उम्मीद भी जताई। उन्होंने बताया कि कैसे बेंगलुरू में लॉ कॉलेज ने इसमें मदद की विशेषतौर पर प्रो डॉ अशोक आर पाटिल ने जो इस वक्त यहां कुलपति हैं वो उस वक्त वहां प्रोफेसर थे उनके सहयोग से ही यह काम हो सका था। उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि यह विश्वविद्लाय भी उन्हें सहयोग करेगा।

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*जागरूकता फिल्म और शपथ*

कार्यक्रम में तंबाकू के हानिकारक प्रभावों पर एक लघु फिल्म दिखाई गई, जिसमें तंबाकू सेवन करने वाले पीड़ितों की दर्दभरी कहानियाँ थीं। डॉ. अविनाश कुमार के नेतृत्व में सभी प्रतिभागियों ने तंबाकू का उपयोग न करने की शपथ ली।

डॉ. आनंदकुमार शिंदे (एनयूएसआरएल) ने सभी का स्वागत किया, जबकि डॉ. सौम्यजीत मुखोपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह भरोसा दिलाया कि विश्वविद्लाय किसी भी तरह के सहयोग के लिए हमेशा तैयार रहेगा। यह कार्यशाला तंबाकू मुक्त समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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