

रांची : नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्ट्डी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची के सेंटर फॉर लेबर लॉ (CLLR) ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के सहयोग से विश्वविद्यालय में आज में 'बदलती अर्थव्यवस्था में श्रम कानूनों का सुधार – चौराहे पर खड़े श्रम कानून' विषय पर न्याय सेतु परियोजना के अंतर्गत एक पैनल चर्चा-सह-कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में विशिष्ट गणमान्य अतिथि, विधिक विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद् तथा रांची और रामगढ़ जिलों के पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) एकत्रित हुए और श्रम कानून, न्याय तक पहुँच तथा पूर्व-मुकदमेबाजी विवाद समाधान तंत्र की समकालीन चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
प्रमुख विशेषताएँ
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के उप सचिव श्री अभिषेक कुमार ने हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए न्याय को सुलभ उपलब्ध कराने और कानून की बेहतर समझ बनाने में JHALSA की भूमिका को रेखांकित करते हुए विश्वविद्यालय और सीसीएल के इस साझा प्रयास की सराहना की। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, औद्योगिक श्रमिकों, महिलाओं, बच्चों और अन्य वंचित वर्गों को उपलब्ध निःशुल्क विधिक सेवाओं पर जोर दिया। उन्होंने सामुदायिक मध्यस्थता को त्वरित, प्रभावी और लागत-कुशल विवाद समाधान तंत्र के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
झारखंड सरकार के विधि विभाग के प्रधान सचिव श्री नीरज कुमार श्रीवास्तव ने सामाजिक वास्तविकताओं के साथ शैक्षणिक ज्ञान को जोड़ने में विश्वविद्लाय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने NALSA द्वारा 2009 में प्रारंभ किए गए पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया और अदालतों का बोझ कम करने तथा समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-मुकदमेबाजी तंत्र पर अधिक जोर देने का आह्वान किया।
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के महाप्रबंधक श्री सिद्धार्थ शंकर लाल ने शिक्षा में निहित सामाजिक जिम्मेदारी पर एक प्रभावशाली उद्बोधन दिया। हजारीबाग के एक न्यायालय में एक आर्थिक रूप से कमजोर वादी को अपने वकील की फीस देने के लिए अपनी जमा-पूंजी सावधानी से खोलते देखने के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए, उन्होंने सुलभ और मानवीय विवाद समाधान तंत्र की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने वंचित समुदायों के लिए CSR-संचालित नवाचारी पहलों के समर्थन में CCL की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और न्याय सेतु परियोजना की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
*क्या है न्याय सेतू*
CLLR-NUSRL द्वारा CCL के सहयोग से संचालित न्याय सेतु परियोजना का उद्देश्य विधिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के बीच सार्थक संपर्क स्थापित करके न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ करना है। मध्यस्थता शिविरों, विधिक जागरूकता अभियानों और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से यह परियोजना वंचित वर्गों के लिए विधिक साक्षरता, शीघ्र विवाद समाधान और कानूनी सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है।
कार्यशाला में विशेष रूप से रांची और रामगढ़ जिलों के बारह प्रखंडों के PLV की क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया और उन्हें विधिक प्रक्रियाओं, श्रम कल्याण कानूनों, शिकायत निवारण प्रणालियों तथा सामुदायिक आउटरीच तंत्रों की व्यावहारिक जानकारी से लैस किया गया।
पैनल चर्चा का समापन विधिक साक्षरता को विस्तारित करने, मध्यस्थता को सुदृढ़ करने और यह सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि न्याय उन लोगों तक पहुँचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।