यूनिसेफ एवं एनसीसी झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में आज सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची में एनसीसी कैडेट्स के लिए आत्म-सम्मान (Self-Esteem) एवं सकारात्मक शारीरिक छवि (Body Image) विषय पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-स्वीकृति तथा व्यक्तित्व विकास को सशक्त बनाना था। यह पहल यूनिसेफ के किशोर-केंद्रित विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई। साथ ही युवाओं में आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी विशेष बल दिया गया।

सत्र के दौरान आत्म-सम्मान की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि आत्म-सम्मान का अर्थ स्वयं के मूल्य, क्षमताओं और पहचान को समझना तथा उन्हें स्वीकार करना है। विशेषज्ञों ने कहा कि उच्च आत्म-सम्मान व्यक्ति को आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेने, तनाव का सामना करने और सामाजिक परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में सहायता करता है।

कार्यक्रम में कर्नल संतोष कुमार, कर्नल सुदीप सिन्हा, सूबेदार मेजर कृष्ण देव सहित अन्य पीआई स्टाफ उपस्थित रहे। इस अवसर पर कर्नल संतोष कुमार ने आत्म-सम्मान और सकारात्मक शारीरिक छवि को व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि आत्मविश्वास से परिपूर्ण युवा ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।

उन्होंने कैडेट्स को आत्मविश्वास, सकारात्मक शारीरिक छवि तथा 21वीं सदी के आवश्यक जीवन कौशलों के विकास पर ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों को सत्र से प्राप्त जानकारियों और सीखों को अपने मित्रों तथा अन्य युवाओं के साथ साझा करने के लिए भी प्रेरित किया।

सत्र का संचालन यूनिसेफ झारखंड के एनयूएनवी (NUNV) एवं बाल संरक्षण अधिकारी गौरव ने किया। उन्होंने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों को सामान्य बताते हुए सही मार्गदर्शन और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच, सामाजिक दबाव और दूसरों से तुलना करने की प्रवृत्ति युवाओं के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। इसलिए आवश्यक है कि युवा स्वयं को समझें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।

कार्यक्रम के दौरान कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और प्रश्नोत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति एवं संवादात्मक गतिविधियों ने पूरे सत्र को रोचक, प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया।

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