*Image by IPRD, Jharkhand

प्रदेश को हरा-भरा रखने के लिए नए पौधे लगाने के साथ जंगलों एवं वन्य प्राणियों के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की सबसे प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. इस सिलसिले में पिछले साढ़े चार सालों से व्यापक और वृहद पैमाने पर पौधरोपण का अभियान चलाया जा रहा है और जंगलों का सीमांकन कर पेड़ों के कटाव पर रोक लगा दी गई है. वन,पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री इंदु शेखर चतुर्वेदी ने आज सूचना भवन मे
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने हुए यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि 2015 से अबतक 12,09,89,185 पौधे लगाए गए हैं.  इसी का नतीजा है कि झारखंड में वन एवं वृक्षावरण क्षेत्र बढ़कर राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 33.21 प्रतिशत हो गया है. इस तरह राष्ट्रीय वन नीति में निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में पहली बार झारखंड को सफलता मिली है.
जन-भागीदारी से पौधरोपण बना बड़ा अभियान

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि पौधरोपण को व्यापक अभियान का रूप देने के लिए जन-भागीदारी पर विशेष जोर है. आज न सिर्फ विभाग, बल्कि आम लोग भी पौधों को लगाने व रखरखाव के लिए आगे आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वनों के प्राकृतिक पुनर्जनन और नदियों के पुनर्जनन को विशेष तरजीह दी जा रही है. 2018-19 से चल रहे वनों के प्राकृतिक पुनर्जनन योजना के अंतर्गत प्राकृतिक पौधों के पुनर्जनन के माध्यम से वनों के घनत्व और गुणवत्ता को बढ़ाया जा रहा है. भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून के द्वारा जारी स्टेट आफ फॉरेस्ट रिपोर्ट -2017 के मुताबिक झारखंड में वनों का घनत्व बढ़कर 18.2 करोड़ घन मीटर हो गया है, जो 2013 की तुलना में 14 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, नदियों के पुनर्जनन के अंतर्गत 2018-19 में 408 किलोमीटर नदी तट पर 16.20  लाख पौधे लगाए गए हैं. जन-भागीदारी से पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों में हर साल नदी महोत्सव-सह-वन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जन वन योजना के तहत लाभुक को पौधरोपण का 75 प्रतिशत दे रही सरकार

वर्ष 2016-17 से शुरु हुए मुख्यमंत्री जन वन योजना के अंतर्गत  वनों से बाहर वृक्षों के विस्तार किया जा रहा है. इसके अंतर्गत अबतक 6.60 लाख पौधे लगाए गए हैं. श्री चतुर्वेदी ने बताया कि इस योजना के तहत  पौधरोपण की लागत का 75 प्रतिशत लाभुक को सरकार देती है. इस योजना से 1823 किसान लाभान्वित हो चुके हैं. इसके अलावा वन क्षेत्र में जल संग्रहण हेतु 820 चेक डैम बनाए गए हैं.

पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ होने के मिले निशान

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि बाघों की संख्या को लेकर आल इंडिया टाइगर एस्टीमेट रिपोर्ट-2018 में पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ की उपस्थिति नहीं होने की बात सामने आने पर विभाग ने जब सर्वे किया तो दो नर और एक मादा बाघ होने के निशान मिले हैं. इसके साथ सारंडा और हजारीबाग के जंगल में भी बाघ होने के अनुमान हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हजारीबाग, चतरा, लोहरदगा और पलामू होते हुए छत्तीसगढ़ तक टाइगर हैबिटेट जोन है. चूंकि बाघ गतिशील जानवर है और इस  जोन में वह एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में विचरित करता रहता है.

जंगली जानवरों से हुई क्षति के मामले में मुआवजा की राशि में इजाफा

श्री चतुर्वेदी ने बताया कि जंगली जानवरों की वजह से होने वाली क्षति को लेकर सरकार द्वारा मुआवजा की राशि में इजाफा किया गया है. वर्तमान में जंगली जानवरों की वजह से मौत होने पर चार लाख रुपए मुआवजा दिया जाता है. इसी तरह घायलों और फसलों के नुकसान पर भी मुआवजा राशि बढ़ाई गई है.

संवाददाता सम्मेलन में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह विशेष सचिव, वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग श्री अजय कुमार रस्तोगी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, विकास श्री विक्रम सिंह गौड़, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजय कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह कार्यकारी निदेशक, बंजर भूमि विकास बोर्ड श्री शशिनंद क्यूलियार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मानव संसाधन श्री अखिलेश कुमार और सूचना एवं जनसंपर्क के निदेशक श्री रामलखन प्रसाद गुप्ता सहित अन्य मौजद थे.
 

support jharkhand state news

If you value our journalism, consider making a voluntary contribution to help us continue bringing news, stories and information to our readers.

Scan the QR code to contribute

Support Jharkhand State News via UPI

Every contribution, big or small, is appreciated.

must read