कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के सभागार में आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब की वार्षिक बैठक संपन्न हुई। इस मीटिंग के मुख्य अतिथि झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री श्री. बन्ना गुप्ता थे। आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के सभी पदाधिकारियों ने इस मीटिंग में भाग लिया। आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के अध्यक्ष श्री.अनुज सिन्हा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। डॉ.भारती कश्यप ने बैठक में आए नेत्रदान करने वाले परिवारों का परिचय आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के सदस्यों के साथ कराया। कार्यक्रम के दौरान मृत्यु उपरांत अपने परिजनों के नेत्रदान करने वाले परिवारों स्वर्गीय वंशिका सरना, पद्मा देवी जैन, हरी प्रसाद साहू, ओम प्रकाश रुंगटा, नालिनी बेन गाँधी, शकुन्तला देवी और चन्दन बाला कोठारी के सराहनीय कार्यों के लिए स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा सम्मानित किया गया। नेत्रदान  जागरूकता अभियान में सहयोग के लिए डॉ. गंगा प्रसाद सिंह, डॉ. पंकज सोनी, श्री. कमलेश चौहान और विजयेता सिंह को सम्मानित किया गया। 

कश्यप मेमोरियल आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भारती कश्यप ने बताया की पिछले राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े से इस राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े तक हमने 55 नेत्र प्रत्यारोपण किए हैं जिसमें 12 कॉर्निया स्थानीय लोगों द्वारा मृत्यु उपरांत दान में मिले और बाकी के कॉर्निया डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से हमने मंगवाए। कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति में हमें समाज में जागरूकता के स्तर को जांचने के लिए गूगल फॉर्म विकसित किए और 5000 छात्रों को डिजिटल माध्यम से इसे भेजा साथ ही डिजिटल माध्यम से नेत्रदान जागरूकता अभियान भी चलाया। जिस में हमने पाया डिजिटल माध्यम  न्यूज़पेपर टीवी और रेडियो के जैसा ही असरदार है। 

डिजिटल माध्यम से नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद भी जब लोगों से नेत्रदान का शपथ पत्र भरने को कहा गया तो उसमें से सिर्फ 39 प्रतिशत लोगों ने शपथ पत्र भरने की इच्छा जताई 
 जागरूकता के बाद भी लोगों में नेत्रदान की इच्छा नहीं है। यही वजह है कि मृत्यु उपरांत लोग अपने सगे संबंधियों के नेत्रों का दान नहीं करते।

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* अपने नेत्रों के दान के लिए शपत पत्र भरते स्वास्थ्य मंत्री

नेत्रदान के प्रति जागरूकता का प्रतिशत कम है मगर उससे भी कम है जागरूकता के बावजूद नेत्रदान के लिए इच्छा शक्ति का प्रतिशत…

82 प्रतिशत लोगों ने बताया की भारत में नेत्रदाताओं की बहुत कमी है

80 प्रतिशत लोगों को पता था की मृत्यु के छः घंटों के भीतर ही नेत्रदान किया जा सकता है

84 प्रतिशत लोगों पता था की नेत्रदान संभव है

64 प्रतिशत लोगों को पता था की मृत्यु उपरांत घर वालों की सहमती से ही नेत्रदान संभव है

45 प्रतिशत लोगों को ही पता था की नेत्रदान के उपरांत 14 दिनों तक कॉर्निया का प्रत्यारोपण किया जा सकता है

41 प्रतिशत लोगों को ही पता था की नेत्रदान निःशुल्क होता है

 

*सम्मानित हुए नेत्रदाता परिवारों के साथ स्वास्थ्य मंत्री

कार्यक्रम के दौरान नेत्रदान के लाभुक मरीजों ने अपने अनुभव किया साझा :-

उषा देवी, उम्र : 35 वर्ष, सिल्ली, राँची ने बताया की उसके छः भाई बहनों में से तीन को कॉर्निया की जन्मजात बीमारी है। जिसकी वजह से उसकी कॉर्निया ख़राब हो गई है। उसके एक भाई ने कोलकाता में में दूसरे भाई ने कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में डॉ. बी. पी. कश्यप और डॉ. भारती कश्यप के द्वारा नेत्र प्रत्यारोपण करवाया था। मैंने भी एक वर्ष पूर्व कश्यप मोरिअल आई हॉस्पिटल में डॉ. निधी के द्वारा अपना प्रत्यारोपण कराया अब मुझे बहुत अच्छा दिख रहा है और अब मैंने अपने दुसरे आँख का भी प्रत्यारोपण करवा ने के लिए अपना नाम वेटिंग लिस्ट में लिखवा लिए है। मेरा ऑपरेशन आयुष्मान योजना द्वारा मुफ्त किया गया है। 

टीका देवी, उम्र : 72 वर्ष, राँची के बेटे कुणाल ने बताया की मेरी माँ का मोतियाबिंद ऑपरेशन होने के 7 दिन के अंदर ही आंखों की रोशनी पूरी चली गई थी। मुझे कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल की सफल नेत्र प्रत्यारोपण के विषय में जानकारी थी इस लिए मैंने माँ के आँखों का नेत्र प्रत्यारोपण कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में करवाया।  मेरी मां बहुत खुश है और उनकी रोशनी वापस आ गई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम से कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल को जोड़ेंगे ताकि जन्मजात मोतियाबिंद से ग्रसित बच्चों एवं प्रीमेच्योर बच्चों के रेटिना का इलाज लेजर पद्धति द्वारा मुफ्त हो सके। प्रीमेच्योर बच्चों मै रेटिना की बीमारी होने से जन्म के 30 दिन में इलाज न होने से दृष्टि हमेशा के लिए जा सकती है।

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