*Image credit IPRD, Jharkhand

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य के किसान अधिक से अधिक लाह उत्पादन कैसे हो इस पर जोर दें। किसान मार्केटिंग तथा ब्रांडिंग की चिंता न करें। मार्केटिंग एवं  ब्रांडिंग मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम बोर्ड करेगी। 15 दिनों के अंदर भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान एवं राज्य सरकार द्वारा एक मास्टर प्लान तैयार किया जाए। इस मास्टर प्लान में लाह उत्पादन के विकास एवं प्रोसेसिंग इत्यादि से संबंधित प्लान का रूप रेखा तैयार करें। राज्य सरकार जल्द ही पत्राचार के माध्यम से भारत सरकार से केंद्र स्तर पर लाह बोर्ड का गठन करने का अनुरोध करेगी साथ ही साथ लाह उद्योग से जुड़े व्यवसाय को इनकम टैक्स में छूट देने का भी अनुरोध करेगी। किसान द्वारा उत्पादित किए गए सामानों को राज्य सरकार खरीदेगी इस हेतु सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उद्यम बोर्ड का गठन किया गया है। राज्य के किसान आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से लाह की खेती करें। लाह की खेती में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। लाह की खेती को व्यवसाय का रूप दें। जल्द ही राज्य के वैसे जिले जहां पर लाह की खेती होती है वहां लाख प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। सेमीलता बीज को मनरेगा कार्य से जोड़ा जाएगा। मनरेगा के अंतर्गत राज्य के किसान सेमीलता का वृक्ष लगाकर लाह उत्पादन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामकुम द्वारा आयोजित किसान मेला सह कृषि मशीन प्रदर्शनी कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबंोधित करते हुए कहीं। 

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि लाह एक बहुपयोगी प्राकृतिक उत्पाद है तथा भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है। झारखण्ड देश का सबसे बड़ा लाह उत्पादक राज्य है। झारखंड का लाह उत्पादन प्रतिशत देश के कुल उत्पादन का 53 प्रतिशत है। राज्य सरकार के लिए गांव, गरीब और किसान का हित सर्वोपरि है। राज्य के किसान लाह उत्पादन से जुड़कर समृद्ध बन सकेंगे। राज्य से गरीबी मिटाने में लाह की खेती कारगर साबित होगी। किसान अधिक से अधिक लाह उत्पादन वाले वृक्ष लगाएं। सेमी लता का वृक्ष लगाकर लाह उत्पादन को बढ़ाएं। खेतों के मेढ़ों में लाह उत्पादन वाले वृक्ष अवष्यय लगाएं। इससे आमदनी के स्रोत बढ़ेंगे। किसान के हित में किये जा रहे कार्य एवं सेमी लता के सफल शोध के लिए मुख्यमंत्री ने भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामकुम के निदेषक सहित पूरी टीम की प्रषंसा की। 

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों के आय को दोगुना करना सरकार का लक्ष्य है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा होगा जब किसान खेती के साथ-साथ पषुपालन करेंगे। गाय पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन ,मधुमक्खी पालन इत्यादि कार्य से आय में वृद्धि होगी। मधुमक्खी पालन से राज्य में मीठी क्रांति की शुरुआत होगी। हनी प्रोसेसिंग प्लांट भी जल्द ही राज्य में स्थापित किए जाएंगे। किसानों द्वारा उत्पादन किए गए हनी को राज्य सरकार खरीदेगी। झारखंड में उत्पादित हनी का मार्केंटिंग बाबा रामदेव की कम्पनी पतंजलि करेगी। तीन लाख बेरोजगार गरीब माताओं और बहनों को रोजगार से जोड़ना सरकार का लक्ष्य है। मधुमक्खी पालन से जुड़े 600 किसानों को को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। यह ट्रेनर वैसे किसान जो मधुमक्खी पालन के क्षेत्र से जुड़ना चाहते हैं उन्हें प्रशिक्षित करेंगे। इस बार के बजट में किसानों के लिए विषेष योजना बनाई गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होगी जब किसान समृद्ध होंगे। राज्य एवं देष की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार किसान और मजदूर ही होते हैं।
 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु विकास समिति का गठन किया जा रहा है। वैसे गांव जहां पर 50 प्रतिषत आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं वहां पर आदिवासी विकास समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही वैसे ग्रामीण क्षेत्र जहां पर गैर आदिवासी समुदाय के ज्यादा लोग रहते हैं वहां पर ग्राम विकास समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष महिला रहेंगी एवं सचिव 18 वर्ष से 35 वर्ष के नौजवान युवक- युवती होंगे।  केंद्र  एवं राज्य सरकार द्वारा बजट 2018 -19 में गांव गरीब और किसानों के समग्र विकास के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं पर ज्यादा फोकस किया गया है एवं बड़ी राशि का प्रावधान रखा है। कृषि कार्य हेतु सिंचाई इत्यादि की योजनाएं गांव के लोग गांव में ही बैठकर कर सकेंगे। अपने गांव का विकास संबंधि योजना आप स्वंय तय करें। झारखण्ड आने वाले समय में देष की विकसित राज्यों की श्रेणी में अव्वल स्थान पर होगा। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कहा कि भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामकुम बहुत ही पुरानी संस्थान है। स्थापना के बाद से ही यह संस्थान किसानों के हित में कार्य कर रहा है। लाख उत्पादन से जुड़े किसानों के आमदनी बढ़ाने के लिए इस संस्थान द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। लाख की खेती राज्य के किसानों के लिए नगदी फसल है। लाख पेड़ में लगा हुआ बैंक के रूप में कार्य करता है। किसान वर्ग के लोग घर के कई आवष्यक कार्य लाख बेचकर करते हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लाख उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लाख बोर्ड का गठन भी किया गया है। लाख के बीज की उपलब्धता पर भी सरकार जल्द ही नीति बनाएगी। उन्होंने किसानों से अपील कि की वे लाख के पेड़ों को बढ़ाएं। वनोपज को आय का स्रोत बनाएं। व्यवसायिक खेती पर जोर दें। सरकार गांव, गरीब और किसान केे साथ खड़ी है। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम बोर्ड एवं भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामकुम के बीच एक समझौता ज्ञापन पर सहमति बनीं।

मुख्यमंत्री ने मेले में लगी प्रदर्षनी का उद्घाटन किया तथा संस्थान के उत्पाद प्रदर्ष इकाई स्थित पायलट संयंत्र का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर लाख की खेती में उल्लेखनीय योगदान के लिए किसानों को मुख्यमंत्री के कर कमलों द्वारा सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रमें में मुख्य रूप से स्थानीय विधायक राम कुमार पाहन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील कुमार वर्णवाल, कृषि सचिव पूजां सिंघल, निदेषक झारक्राप्ट मंजूनाथ भजन्त्री, झारक्राप्ट की सीईओ रेणु गोपीनाथन, मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार, भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान नामकुम के निदेषक डाॅ के0के0षर्मा, कार्यक्रम के संयोजक निर्मल कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित हुए थे। कार्यक्रम को संचालन डाॅ0 अंजेष कुमार ने किया। 

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