झारखंड उच्च न्यायालय परिसर में आचार्य मुक्तरथ जी के सानिध्य में चल रहे दस दिवसीय योग स्वास्थ्य प्रबंधन शिविर का आज हुआ समापन।

शिविर में दो सौ से भी ज्यादा संख्या में हाई कोर्ट के अधिकारी, रजिस्ट्रार, असिस्टेंट एवं कर्मचारियों ने योग से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। माननीय चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन एवं माननीय जस्टिस श्री अपरेश कुमार सिंह के निर्णय से आयोजित यह कैम्प बहुत लोगों के लिये स्वास्थ्य वर्धक सिद्ध हुआ। 

आचार्य मुक्तरथ ने बताया कि आज ऑफिस जाने के लिये न तो साईकल है और न लोगों के पास समय है। ऐसी परिस्थिति में खुद को स्वस्थ रखने के लिये यौगिक साइकिल की जरूरत है। व्यक्ति को हर दिन नब्बे मिनट यानि डेढ़ घण्टा अपने स्वास्थ्य के लिए निकलना होगा तभी आप बढ़ते हृदय रोग को, मधुमेह को,डिप्रेशन और एंजाइटी को अनिद्रा और हाइपरटेंशन को रोक सकते हैं तथा दूर हटा सकते हैं। 

उन्होंने कहा योग के सरल अभ्यास पवनमुक्तासन पार्ट-1 और नाड़ीशोधन तथा भ्रामरी प्राणायाम से बड़ी-बड़ी बिमारियों से मुक्ति पाया जा सकता है। शलभासन और भुजंगासन से पूरे मेरूदंड को स्वस्थ रखा जा सकता है। पवनमुक्तासन भाग-2 और सूर्यनमस्कार के अभ्यासों से मधुमेह और पूरे पाचन प्रणाली को दुरुस्त रखा जा सकता है।

" योगनिद्रा " एंजाइटी और स्ट्रेस से व्यक्ति को मुक्त रखता है। और ये सभी योग साधनायें बहुत सरल हैं

ऐसे सरल योग के अभ्यासों को कोई भी व्यक्ति कर सकता है। योग का शक्तिशाली पक्ष है दिमाग के सुषुप्त केन्द्रों की जागृति जिसमें मनुष्य की असीमित प्रतिभा छिपी हुई है। जब योग की क्रियाओं को श्वांस के साथ पूरी तन्मयता के साथ एकाग्रचित होकर किया जाता है तो उससे दिमाग खुलने लगते हैं, दिमाग में स्थिरता आती है और फिर अंदर के सुषुप्त केंद्र जागृत होने लगता है। 

इससे कुशल स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है,रोग नष्ट होते हैं और बुद्धि प्रकाशित होती है। लगातार ऐसा होने से व्यवहार और सोच-विचार उच्च होने लगता है और फिर मनुष्य अपने आप को सच्चा मनुष्य के रूप में देख पाता है। 

दस दिनों के अभ्यास से सभी लोगों को काफी लाभ मिला है और भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने योगाभ्यास को लगातार कराने की इच्छा व्यक्त की है।

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