झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार कहती है कि वे ओडिशा की तर्ज पर राज्य में पंचायत चुनाव २०२२ कराने का फैसला लिया है।

सच तो ये है की ओडिशा विधानसभा, ने ओडिशा पंचायत कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पारित किया था, जिसमें ST, SC और OBC की तीन श्रेणियों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में सीटों के आरक्षण को 50 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान किया गया है.

अगर हेमंत सरकार ओडिशा की तर्ज पर राज्य में पंचायत चुनाव २०२२ कराती है तो उसे भी ST, SC और OBC की तीन श्रेणियों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में सीटों के आरक्षण को 50 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान करना होगा।

जो भी हो गुरुवार को झारखंड में कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी की राज्य में पंचायत चुनाव मई तक संपन्न कराने संबंधी प्रस्ताव को राजभवन भेजने की अनुशंसा भी की। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण मामले में शर्त रखी है। कोर्ट ने कहा है कि अगर राज्य सरकार OBC आरक्षण के तहत चुनाव कराना चाहती है तो इसके लिए आयोग का गठन करना होगा। 

आयोग OBC का आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण करेगा। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा। 

अगर सरकार तत्काल चुनाव कराना चाहती है तो OBC को सामान्य वर्ग का मानते हुए चुनाव करा सकती है।

हेमंत सोरेन सरकार को कुछ सरते को लागू करना होगा-


* राज्य सरकार को सबसे पहले आयोग का गठन करना होगा।
* आयोग OBC का सामाजिक-आर्थक सर्वेक्षण करेगा।
* आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा।
* सरकार OBC को सामान्य मानते हुए चुनाव करा सकती है।
* ओडिशा की तर्ज पर चुनाव कराने का फैसला

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