दिल्ली में राहुल गांधी,बंगाल की ममता, उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल, मुंबई के उद्धव ठाकरे में एक चीज़ समान है। देश की राजनीति में अपना नाम ऊपर में रखना चाहते है। अब एक ओर नाम जुट गया है।ऐ हैं चंद्रशेखर राव।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ( KCR) आज शुक्रवार की दोपहर झारखंड पहुंचे। उन्होंने राजधानी रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। 

इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन सहित कई और लोग मौजूद रहे। इसके बाद दोंनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति पर चर्चा हुई।सूचना ये है  कि दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों का नया मोर्चा बनाने के मुद्दे पद विचार किया। 

लेकिन जनता को एक बड़े विषय को उभार कर। विषय ये की 
अपने दौरे के दौरान KCR बिहार रेजिमेंट के शहीद जवान कुंदन ओझा की पत्नी नम्रता ओझा को दस लाख रुपये का सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

साफ़ है कि KCR इन दिनों भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प तलाशने की कोशिश में लगे हैं। इससे पहले उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन जैसे भाजपा विरोधी दलों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। झारखंड के दौरे से पहले गत 20 फरवरी को उन्होंने मुंबई जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। 

दो दिन पहले 3 मार्च को राव ने दिल्ली में मोदी का लगातार विरोध कर रहे सुब्रमण्यम स्वामी और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैट से मुलाकात की। दिल्ली के बाद उन्होंने झारखंड का रूख किया है।
इसके पहले 16 जून 2020 को लद्दाख के गलवन घाटी में चीनी सेना से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त करनेवाले कुंदन ओझा झारखंड के साहिबगंज जिले के सदर प्रखंड के डिहारी गांव के रहने वाले हैं। 

चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री तेलंगाना सरकार की तरफ से शहीद कुंदन ओझा की पत्नी नम्रता ओझा को दस लाख रुपये की सहायता देगे। 

याद करे कुंदन ओझा को मरणोपरांत सेना मेडल मिल चुका है। 15 जनवरी 2022 को नई दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में नम्रता ओझा को थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने यह मेडल सौंपा था। कुंदन ओझा का नाम वार मेमोरियल में भी अंकित किया गया था।

 

अब ज़रा KCR के द्वारा कुछ दिन पहले का इतिहास देखें। वे  पहले तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक रहे। राज्यसभा में जब भी विधेयकों को पास कराने की जरूरत पड़ती तो उनकी पार्टी ने अक्सर केंद्र सरकार का साथ दिया। 

आज जब लोक सभा का चुनाव २०२४ में होना है तो इस बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में KCR ने मोदी और भाजपा विरोध का झंडा उठा लिया है। 

मुख्य कारण यह है कि तेलंगाना में KCR का TRS को भाजपा से भारी चुनौती मिल रही है। तो वो अब वहां का मुकाबला कांग्रेस के बजाय भाजपा से करने में जुट गए है।ऐसे में वे मोदी विरोधियों में सबसे आगे दिखना चाहते हैं। वह कांग्रेस की बजाय दूसरे सभी विपक्षी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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