चारा घोटाले में सजायाफ्ता RJD सुप्रीमो लालू यादव को चाईबासा कोषागार में मिली जमानत याचिका को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

इसका मतलब साफ़ है। और वह ये की लालू यादव की मुश्किलें अब एक बार फिर से बढ़ सकती है।

 डोरंडा कोषागार मामले में जमानत के लिए संघर्ष कर रहे लालू यादव को अब चाईबासा कोषागार में मिली जमानत का भी जवाब देना होगा। दरअसल, चाईबासा कोषागार में मिली जमानत याचिका को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट जल्द इस मामले की सुनवाई करेगी।साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर लालू को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। आज सोमवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की बेंच ने लालू यादव की बेल अर्जी के खिलाफ याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया।

चाईबासा राजकोषीय मामले में भी 9 सितंबर, 2020 को लालू यादव को बेल दी गई थी। उसके खिलाफ भी अर्जी दायर की गई है, जिस पर अदालत ने सुनवाई का फैसला लिया है। अविभाजित बिहार के कई जिलों के राजकोष से चारा घोटाले में अवैध निकासी के मामले में उनको दोषी पाया गया था।

रांची में CBI के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद ने 24 जनवरी 2018 को चाईबासा कोषागार मामले में लालू यादव को 5 साल की सजा सुनाई थी। चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 33 करोड़ 67 लाख 534 रुपए निकाले गए थे। इस मामले की सुनवाई 10 जनवरी को पूरी हुई थी और इसमें राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव के अलावा 56 आरोपी थे।

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