स्पीकर के न्यायाधिकरण ने दसवीं अनुसूची के मामले में सुनवाई करते हुए आज सारी आपत्तियों को रिजेक्ट कर दिया। न्यायाधिकरण ने सुनवाई के दौरान प्रिलिमनरी ऑब्जेक्शन को अस्वीकार कर दिया। बाबूलाल मरांडी के अधिवक्ता की ओर से ऑब्जेक्शन किया गया था। अब केवल इस मामले में मेरिट पर सुनवाई होगी। इसके साथ ही अब फैसला जल्द आने की उम्मीद बढ़ गयी है। बाबूलाल मरांडी की सदस्यता रहेगी या जाएगी, उन्हें नेता प्रतिपक्ष प्रतिपक्ष की कुर्सी मिलेगी या फिर उन्हें चुनाव में जाना होगा, इसे लेकर सभी में उत्सुकता है।

बाबूलाल मरांडी ने वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झाविमो के सिंबल पर धनवार विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने झाविमो का विलय भाजपा में कर दिया। इसे चुनाव आयोग की स्वीकृति मिल गई, लेकिन विधानसभा ने विलय को मान्यता देने से इनकार कर दिया। मरांडी के निर्णय के खिलाफ पूर्व विधायक राजकुमार यादव, जेएमएम विधायक भूषण तिर्की, कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह और विधायक प्रदीप यादव एवं बंधु तिर्की ने याचिका दायर की थी। इन सभी की ओर से चार अलग-अलग याचिका दायर कर बाबूलाल मरांडी मरांडी पर दलबदल के तहत कार्रवाई करते हुए अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए स्पीकर न्यायाधिकरण में शिकायत दर्ज कराई है। विवाद के कारण भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बावजूद मरांडी नेता प्रतिपक्ष घोषित नहीं किए गए। यह पद दिसंबर, 2019 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से खाली है।

स्पीकर रविंद्र नाथ महतो के न्यायाधिकरण में आज ( May 9)इसकी सुनवाई हुई। अब सिर्फ इस मामले में केवल संवैधानिक बिंदुओं पर बहस होगी। इससे पहले 6 मई को भी स्पीकर ने इस मामले में सुनवाई की थी। राजकुमार यादव और भूषण तिर्की की ओर से दायर याचिका पर बहस के दौरान बाबूलाल मरांडी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित मामला हाई कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में स्पीकर के न्यायाधिकरण में सुनवाई नहीं हो। यह दो संस्थाओं के टकराव का मामला न बन जायें। इसलिए याचिका स्पीकर के कोर्ट में खारिज कर दिया जाए। 

11 फरवरी 2020 को झाविमो का भाजपा में विलय हुआ था
वहीं दूसरी दलील यह दी गई कि यह केस विधानसभा की नियमावली के प्रतिकूल है। 11 फरवरी 2020 को झाविमो का भाजपा में विलय हुआ था। 6 मार्च 2020 को इलेक्शन कमीशन ने विलय को सही करार दिया। विलय के 10 महीने बाद मरांडी के खिलाफ 16 दिसंबर 2020 को पहला केस फाइल किया गया था। दसवीं अनुसूची के प्रावधान 6 के तहत दलबदल के मामले में देर से किया किया गया ऑब्जेक्शन खारिज हो जाएगा।

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