झारखंड की राजधानी राँची में बिहार क्लब दुर्गा पूजा समिति के दुर्गा माँ की पूजा पंडाल के अंदर की आंतरिक साज-सज्जा नेत्रदान महादान के थीम पर की गयी है। 

इसमें दिखाया गया है कि एक नेत्रहीन आदमी दुर्गा पूजा देखने के लिए निकला है, लेकिन वह पूजा की खुशी को देख नहीं पा रहा है। फिर भी स्पीकर से आ रही आवाज और स्पर्श से सब कुछ अनुभव करता है। 

वस्तुओं को छूकर समझता और इसके बारे में दूसरों को बताता भी है। बिहार क्लब दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष डॉ अजीत सहाय ने कहा कि नेत्रदान में मिली आंख से वह दंपति फिर से दुनिया देखने लगता है। साथ ही दूसरों को आंखें दान करने के लिए प्रेरित करता है।

पंडाल के अंदर छत पर भी आंख बनी हुई है। एक व्यक्ति बना हुआ है, जिसकी दोनों आंखें हाथ से बंद की हुई है। बाहर में एक दृष्टिहीन व्यक्ति ब्रेल लिपि से पढ़-पढ़ कर पूजा के आयोजन को समझ रहा है। इसके अलावा कैसे एक दृष्टिहीन महिला मां की मूर्ति के विसर्जन के बाद कॉर्निया प्राप्त करती है और भगवती की कृपा से उस दृष्टिहीन को दृष्टि प्राप्त हो जाती है। इस थीम को पेंटिंग से बहुत अच्छा उकेरा गया है।

कश्यप मेमोरियल आई बैंक की डायरेक्टर डॉ भारती कश्यप ने बताया कि पंडाल के अंदर और बाहर में नेत्रदान की थीम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सैकड़ों लोगों ने नेत्रदान का शपथ पत्र भरा। नेत्रदान आइ महादान सेल्फी प्वाइंट पर युवाओं की भारी भीड़ लग रही है।

बिहार क्लब द्वारा बनाए गई राँची के दुर्गा माँ की पंडाल में नेत्र दान की पहल दिखाई गई है. देखें:

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