झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में 1932 आधारित स्थानीय नीति और आरक्षण संशोधन विधेयक पास कर दिया गया। 1932 स्थानीय नीति के संबंध में तीन प्रस्ताव पेश किये गये जिसमें प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया गया था।

 मुख्यमंत्री ने इन तीनों प्रस्तावों पर जवाब देते हुए प्रवर समिति को भेजने से इनकार कर दिया। चर्चा के बाद 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति ध्वनि मद से पास कर दिया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, पिछले साल हमने सरना कोर्ड पारित किया था। आज का दिन शुभ है। भाजपा के विधायकों के रिश्तेदारों के यहां लाखों करोड़ मिलते हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। गरीब आदिवासी के यहां एक दाना नहीं मिलता तो उसे फंसा दिया जाता है। अब ईडी - सीबीआई से सत्ता पक्ष डरने वाला नहीं है, हम जेल में रहकर भी आपका सुपड़ा साफ कर देंगे।

इस विधेयक पर भाजपा के डॉ अमित कुमार यादव ने कहा, जिनके पास खतियान नहीं है उन्हें ग्रामसभा के प्रस्ताव से पास होने का प्रवधान है। अगर यह आम सभा के माध्यम से किसी को भी झारखंडी करार दे दिया गया तो क्या उसे झारखंडी मान लिया जायेगा।

जिस व्यक्ति का खतियान नहीं है वह आवेदन करे, उसमें वंशावली दे और जांच के बाद ही इस पर फैसला लिया जाए। झारखंड में बंग्लादेशी घुसपैठ कर रहे हैं इसलिए इस पर कड़ा कानून बनाया जाना चाहिए। ग्रामसभा वंशावली के बगैर इसे ना करे। जांच के बाद ही इस पर फैसला लिया जाए।

भाकपा माले विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कई ऐसे परिवार हैं जो भूमिहीन हैं। इस विधेयक के नाम पर भी स्पष्टता नहीं है। स्थानीयता पूरी तरह से नियोजन से जुड़ा है। यह सिर्फ एक दस्तावेज बनकर ना रह जाए, इसकी नियोजन में उपलब्धता रहे, इसका लाभ मिले। यह भी स्पष्ट करने की जरूरत है। इसलिए इसे प्रवर समिति को भेजना चाहिए।

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