*नीचे 12 जुलाई को राजधानी रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में 1500 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के दौरान सीएम हेमंत सोरेन द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाने के दौरान फ्रेम वाली एक तस्वीर दिखायी गयी है.

किसी ने लिखी किताब तो किसी ने चला अपना अलग दांव, क्या हेमंत की दाढ़ी रोक पायेगा सत्ता की ओर बढ़ते भाजपाई पाँव. 

रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में रहने के दौरान और उसके बाद अपनी बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक राजनीतिक शहीद सरीखी छवि धारण कर ली है जिसके प्रभाव को न केवल वे बल्कि उनके विरोधी भी अच्छी तरह समझ रहे हैं. 

इस बात की पूरी संभावना है कि इस साल 2024 के अंतिम महीनों में होनेवाले संभावित विधानसभा चुनावों के प्रचार में सीएम हेमंत सोरेन की दाढ़ी झारखण्ड में बीजेपी के खिलाफ घातक हथियार के रूप में काम करेगी. 

जेल जाने से पहले तक अबतक के अपने जीवन में अर्थात छात्र जीवन से लेकर दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहने तक हेमंत सोरेन ने केवल मूंछें ही रखी थी जो उनके चेहरे का ट्रेडमार्क लुक जैसा बन गया था. 

हेमंत के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया जब 31 जनवरी 2024 को उनकी स्थितियाँ बदल गयी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया. फिर हिरासत में लेकर पूछताछ की और उन्हें जेल भेज दिया गया. 

माना जाता है कि लगभग पाँच महीने तक जेल में रहने के दौरान हेमंत ने दाढ़ी नहीं कटवायी. नतीजतन, मूंछों के साथ उनका सामान्य लुक भी सफेद-काली दाढ़ी के छाँव तले लगभग उस स्वरुप में तब्दील हो गया जिसे अक्सर कई हलकों में सम्मानजनकता, परिपक्वता और यहाँ तक ​​कि मर्दानगी के संकेत के रूप में लिया जाता है. 

दरअसल उनके लिये यह विशेष रूप से राजनीतिक प्रताड़ना के शिकार के कारण पीड़ित की छवि को चित्रित करने का भी काम कर रहा है. 

आख़िरकार हम सभी जानते ही हैं कि राजनीति में अक्सर तर्क-वितर्क से पहले धारणा कहीं ज़्यादा मायने रखती है. संयोग से उनके पिता, झामुमो के संस्थापक और राज्यसभा सदस्य शिबू सोरेन, जीवन भर हमेशा दाढ़ी रखते रहे हैं. ऐतिहासिक रूप से, दाढ़ी कई राजनेताओं के लिये बहुत मायने रखती है और इसे आम अवाम देख चुका है. 

 उधर जनजातीय समाज के साथ ही आम जनमानस में भी दाढ़ी का अपना अलग ही रुतबा या रसूख है. अनेक समुदायों और धर्मों में, दाढ़ी का अपना सकारात्मक प्रतीक और अर्थ होता है और अक्सर पुरुषों के लिये यह सम्मान, बहादुरी और परिपक्वता का प्रतीक है. 

उदाहरण के लिये सेल्टिक जनजातियों में, दाढ़ी को इतना सम्मान दिया जाता था कि जब भी ओट्टो महान को कोई बड़ी गंभीरता और महत्व की बात कहनी होती थी, तो वह अपनी दाढ़ी की कसम खाता था. 

एक आदिवासी किसान रुबिन मांझी के अनुसार अगर आज पुरुषों को अपनी चेहरे की दाढ़ी की कसम खानी पड़े तो दुनिया कहीं अधिक ईमानदार और भरोसेमंद जगह साबित हो सकती है. शिबू सोरेन ने साहूकारों के खिलाफ विद्रोह और आंदोलन का नेतृत्व किया था. 

झारखण्ड अलग राज्य निर्माण के लिये भी उन्होंने आंदोलन चलाया. इधर अपनी दाढ़ी को साफ-सुथरा न करके मूंछों के साथ वाले चेहरे के साथ लोगों के बीच जाने को प्राथमिकता देते हुए सीएम हेमंत सोरेन भी अपने पिता शिबू सोरेन की तरह लोगों को अपने क्रांतिकारी होने का संदेश देते नजर आ रहे हैं. 

हेमंत की दाढ़ी से जुड़े कथित संदेश को झामुमो समर्थक कृष्णा उरांव ने अपनी तरह से डिकोड करने की कोशिश की जिसने उन्हें अपने दाढ़ी वाले चेहरे के साथ दिखाने वाला एक फ्रेम बनाया है. 

कृष्णा उराँव के अनुसार उनकी दाढ़ी पूरे राज्य में वही बात बारम्बार दोहराती है जो हेमंत सोरेन सार्वजनिक रूप से दोहरा रहे हैं - "मुझे लोगों के विकास के लिये काम करने से रोकने के लिये भाजपा ने झूठे आरोपों में जेल भेजा था."  

हर हाल में हेमंत सोरेन जो एक आदिवासी हैं, धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं और उनकी पार्टी झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के समर्थन में मुख्य रूप से आदिवासी, ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं.  

उपरोक्त पृष्ठभूमि में, विपक्षी भाजपा इस तथ्य से अवगत है कि आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ झामुमो के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन के सहयोगी दल - कांग्रेस, राजद और वामपंथी दल - "पीड़ित कार्ड" खेलेंगे. यानी जानबूझकर मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर भाजपा द्वारा हेमंत सोरेन को जेल भेजा गया था. 

इससे सीएम सोरेन 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी दाढ़ी वाले चेहरे को बरकरार रखकर चुनावी युद्ध के दौरान आक्रामक रूप से मैदान में उतर सकते हैं. 

कई दिग्गज स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल परिसर के अंदर किताबें लिखकर समय बितायी थी. हमारे अनेक नेताओं ने लोगों को यह बताने के लिये अपने चेहरे पर दाढ़ी बढ़ा ली है कि चूंकि वह आदिवासी परिवार से आते हैं, इसलिये उन्हें मनगढ़ंत आरोपों पर जेल भेज दिया गया.” 

लगभग एक दर्जन आदिवासियों से www. jharkhandstatenews.com द्वारा इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद उनकी भावनाओं की बात करना बहुत जरूरी है. झामुमो के एक नेता ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए खुले रूप में इन बातों का समर्थन किया. 

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