अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् की राष्ट्रीय कार्यसमिति की 10-11 जुलाई को वर्चुअल (आभासी) बैठक सम्पन्न हुई जिसमें सम्पूर्ण भारत वर्ष से 90 प्रतिनिधियों ने भाग लिया । बैठक के प्रारम्भ में कोविड से दिवंगत हुए लोगों को श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।

एक प्रेस रिपोर्ट रितेश कुमार बाॅबी,मिडिया प्रभारी,अधिवक्ता परिषद झारखण्ड, के अनुसार,बैठक में निम्न पांच संकल्प पारित किये गये।

(1) राज्य न्यायिक सेवाओं में प्रवेश हेतु 3 वर्षों के अनुभव की अनिवार्यता को पुनः प्रतिस्थापित किया जाय ।

(2) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2016 में पारित निर्णय की समीक्षा हो ।

(3) पश्चिम बंगाल में विधि के शासन की पुनर्स्थापना हो तथा बंगाल में हिंसा के अपराधियों को उचित दण्ड मिले ।

(4) विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित विभिन्न न्यायाधिकरणों, आयोगों,फोरमों आदि में समय सीमा के अन्दर नियुक्तियां की जाएं ।

(5) भारतीय विधिज्ञ परिषद द्वारा बार काउन्सिल नियमों में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने हेतु कहा जाये । बैठक के प्रारम्भ में कोविड से दिवंगत हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 

राष्ट्रीय अध्यक्ष विनायक दीक्षित द्वारा सदस्यों को उद्बोधन के पश्चात 20-21 के लेखा विवरण प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रीय कार्यालय की योजना का विवरण दिया गया । 

राष्ट्रीय महामंत्री डी. भरत कुमार द्वारा परिषद के स्थापना काल 1992 से अभी तक की गौरवशाली यात्रा तथा समाज द्वारा एक संगठन के तौर पर परिषद से अपेक्षाओं के बारे में विचार रखे गये । राष्ट्रीय मंत्री श्रीमती सुमन चौहान ने 2025 हेतु लक्ष्यों को प्राप्त करने के बारे में विचार रखे ।

बैठक में बंगाल के परिप्रेक्ष्य में केन्द्र-राज्य संबंध, सोशल मिडिया की भूमिका ,विधिक प्रश्नों तथा नवीन शासकीय नीति-निर्देशों पर भी विचार रखे गये ।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री श्रीनिवास मूर्ति ने संगठन की गुणवत्ता व विकास तथा पहुंच का विस्तार करने हेतु विचार प्रस्तुत किए।
 

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