“दफ्तर में किसी एक दिन 10 बजे पहुंचने से व्यवस्था बेहतर नहीं बनती बल्कि इसे नियमित बनाए रखना होता है। अगर किसी कर्मचारी के मोटिवेशन में कमी लगती है तो नेतृत्वकर्ता होने के नाते यह दायित्व बनता है कि उसे समय-समय पर बेहतर कार्य के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा समय-समय पर कर्मचारियों के कार्य की रैंकिंग के आधार पर पुरस्कृत करने का काम किया जाता है।”

ये जवाब था झारखंड के सिमडेगा जिले के उपायुक्त सुशांत गौरव का जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज  उनसे  बात की और सुमेधा उपायुक्त से पूछा कि वह अपने कर्मचारियों के मोटिवेशन और को-ऑर्डिनेशन के लिए किन-किन तरीकों का प्रयोग करते हैं। 

उपायुक्त ने कहा कि अगर लोगों के सर्विस रिलेटेड मैटर का ठीक तरीके से समाधान किया जाए तो लोग बड़े खुश होते हैं। अगर कर्मचारियों को समय पर प्रमोशन व इंक्रीमेंट दिए जाएं तो लोगों का उत्साह बना रहता है।

उपायुक्त ने कहा कि चाहें कोई प्रशासनिक सेवा से आया हो, चाहें कृषि सेवा से अथवा इंजीनियरिंग सेवा से। सबको इस बात के प्रोत्साहित किया जाता है कि वह नौकरी करने नहीं सेवा करने आएं हैं। 

“दफ्तर में किसी एक दिन 10 बजे पहुंचने से व्यवस्था बेहतर नहीं बनती बल्कि इसे नियमित बनाए रखना होता है। अगर किसी कर्मचारी के मोटिवेशन में कमी लगती है तो नेतृत्वकर्ता होने के नाते यह दायित्व बनता है कि उसे समय-समय पर बेहतर कार्य के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा समय-समय पर कर्मचारियों के कार्य की रैंकिंग के आधार पर पुरस्कृत करने का काम किया जाता है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नीति आयोग के अधिकारियों के साथ आकांक्षी जिलों में शामिल देश के चुनिंदा 5 जिलों के उपायुक्त से बात कर जिले के विकास और चुनौतियों के बारे में जानकारी ले रहे थे। इन जिलों की सूची में झारखंड के सिमडेगा जिले का नाम भी शामिल किया गया था।

यह कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने प्रधामंत्री के समक्ष आकांक्षी योजना में शामिल किए जाने के कारण जिले में विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास पर करीब डेढ़ मिनट तक अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य के अलावा खेल के क्षेत्र में जिले की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश किया। सिमडेगा जिले को तीन मिनट का समय मिला था।

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन 5 जिलों से बात की। उनमें मेघालय का रिभोई जिला शामिल रहा। इसी तरह जम्मू कश्मीर का बारामुला जिला और महाराष्ट्र का नंदूरबार तथा कर्नाटक का यादगिर जिला शामिल रहा।

मालूम हो कि आकांक्षी जिलों में केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, कृषि और आधारभूत ढांचा के विकास पर कार्य किया जा रहा है। समय समय पर नीति आयोग की ओर से इसका मूल्यांकन भी कराया जाता है। विशेष रूप से चयनित इन जिलों में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं।

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