*Images by IPRD, Jharkhand

मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि राज्य में तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे लोगों, संस्थाओं को चिह्नत कर उन्हें सम्मानित कर प्रोत्साहित करें। वहीं तंबाकू निषेध के इस कार्य में अधिकाधिक लोगों और संस्थाओं को जोड़ें। वे राज्य तंबाकू नियंत्रण समन्वय समित की बैठक में बोल रहे थे। यह बैठक राज्य में स्मोकलेस तंबाकू के बढ़ते प्रचलन पर रोक लगाने को लेकर आयोजित की गई थी। इस अवसर पर तंबाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) 2003 के संस्थानीकरण के लिए एक मार्गदर्शिका का भी विमोचन किया गया।

मुख्य सचिव ने राज्य तंबाकू नियंत्रण कोषांग को निदेष दिया कि तंबाकू नियंत्रण में तेजी लायें। उन्होंने तंबाकू की खेती, तंबाकू आधारित उत्पाद बनाने वालों तथा इसकी खरीद-बिक्री को निरुत्साहित करने के उपायों पर बल दिया। इसके लिए लोगों का कौशल विकास कर दूसरे क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने को कहा। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को इसे लेकर पंचायत स्तर तक जागरूकता फैलाने का निर्देश दिया। उन्होंने पंचायतों को तंबाकू रहित बनाने के उद्देश्य से पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों द्वारा वसूली गई जुर्माना की राशि को पंचायत कोष में देने के सुझाव पर प्रस्ताव देने का निर्देश दिया। 

स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने बसों में तंबाकू सेवन से जुड़ी हानियों को प्रदर्शित करने का सुझाव दिया। पर्यटन सचिव मनीष रंजन ने तंबाकू को लेकर भ्रामक प्रचार पर नकेल कसने की बात कही। राज्य तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति ने राज्य सरकार द्वारा पान-मसाला की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने पर बल दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा पान-मसाला के ट्विन पैक की बिक्री पर रोक के आदेश को राज्य में प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करने की बात कही। कहा गया कि जो भी दुकानदार तंबाकू बेचने का लाइसेंस लेते हैं, उन्हे तंबाकू के अलावा अन्य सामग्री उस खास दुकान में बेचने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। 

इसके पहले राज्य तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति ने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि विश्व में सर्वाधिक मौतें तंबाकू जनित बीमारियों से हो रही हैं। हर सेकेंड छह लोगों की मौत हो रही है। सिर्फ भारत में सलाना 12 लाख लोगों की मौत हो रही है। तंबाकू जनित बीमारियों के इलाज पर भारत में प्रति वर्ष 1 लाख, 4 हजार, 500 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। 

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