झारखंड उच्च न्यायालय से एक जनहित याचिका पर 11 अप्रैल 2022 को जारी आदेश के आधार पर सीबीआइ आज 11 वर्ष पुरानी 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाले की जांच कर रही है।इसी के तहत सीबीआइ की टीम ने भवन निर्माण विभाग से कई अहम दस्तावेज कल लिया था। इसकी जिसकी जांच चल रही है।

ये मामला मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स निर्माण में अनियमितता से संबंधित है, जिसका अनुसंधान सीबीआइ के पटना स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के डीएसपी सुरेंद्र दीपावत कर रहे हैं। पूरा मामला धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने व पद के दुरुपयोग से संबंधित है।

ये जाँच झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर हो रही है। पिछले 11 अप्रैल 2022 को जारी आदेश के आधार पर सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी अज्ञात लोक सेवक व अज्ञात निजी व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई थी। झारखंड हाई कोर्ट ने 11 अप्रैल 2022 को 2017, 2018 व 2019 में दाखिल तीन अलग-अलग पीआइएल पर सुनवाई के बाद सीबीआइ को जांच का आदेश दिया था।

इसमें झारखंड विधानसभा की कमेटी की नौ जनवरी 2008 की रिपोर्ट के अनुसार 424 करोड़ रुपये के रांची, धनबाद व जमशेदपुर में बने मेगा स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के निर्माण में भी अनियमितता की पुष्टि हो चुकी है। मेगा स्पोर्ट्स निर्माण के लिए पहले 206 करोड़ रुपये का बजट था, जो बढ़कर पहले 340 करोड़ और फिर 424 करोड़ रुपये हो गया। सीबीआइ के अधिकारी इन्हीं सभी अनियमितता से संबंधित दस्तावेज लेने के लिए भवन निर्माण विभाग पहुंचे थे।

पहले भी राज्य के भ्रष्टाचरण विरोधी ब्युरो ने प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू की थी।इस घोटाले में आयोजन समिति के अध्यअक्ष आरके आनंद, निदेशक पीसी मिश्रा, महासचिव एसएम हाशमी,कोषयधकच मधु कानत पाठक और उस समय के खेल मंत्री बंधु तिरकी को भी ३४ वे खेल घोटाला में आरोपी बनाया गया था। फ़िल हाल ये सब ज़मानत पर है।2010 में ही एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी. इस घोटाले में आयोजन समिति के अध्यक्ष आरके आनंद, निदेशक पीसी मिश्रा, महासचिव एसएम हाशमी, कोषाध्यक्ष मधुकांत पाठक को आरोपी बनाया गया. तत्कालीन खेल मंत्री बंधु तिर्की को भी 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाला में आरोपी बनाया गया. फिहलाल ये सभी जमानत पर हैं. 

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