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*सांगवोल सोसाइटी भारत और नेपाल स्थित बौद्ध स्थलों के लिए पैदल तीर्थ  यात्रा का आयोजन करेगी*

*भारत द्वारा जी-20 की अध्यक्षता का आदर्श वाक्य बौद्ध शिक्षाओं के अनुरूप है: भारत में दक्षिण कोरिया के राजदूत श्री चांग जे-बोक*

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री अपूर्व चंद्रा ने घोषणा की है कि कोरिया गणराज्य के 108 बौद्ध तीर्थयात्री सांगवोल सोसाइटी ऑफ साउथ कोरिया द्वारा आयोजित पैदल यात्रा के हिस्से के रूप में 43 दिनों में 1,100 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा करेंगे।

श्री चंद्रा ने कहा कि इस अवसर का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि भारत और दक्षिण कोरिया आपसी राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। तीर्थयात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को बढ़ाना है। पर्यटक भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित बौद्ध तीर्थ स्थलों की यात्रा करेंगे और बाद में नेपाल जाएंगे।

श्री चंद्रा ने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विजन था कि भारत में बौद्ध पर्यटन सर्किट को दुनिया भर में प्रचारित किया जाए। इस सर्किट का उद्देश्य पर्यटकों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में जानने में मदद करना और बुद्ध के जीवनकाल के दौरान उनके पदचिह्नों की खोज करना है। तीर्थयात्रा के दौरान कवर किए जाने वाले स्थलों में बुद्ध के जन्म से लेकर उनके परिनिर्वाण तक का जीवन शामिल है।

सचिव ने तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और भारत सरकार की ओर से सभी तरह की सहायता का आश्वासन दिया और आशा व्यक्त करते हुए कहा कि तीर्थयात्री इस यात्रा से बौद्ध दर्शन की गहरी समझ प्राप्त करेंगे।

पर्यटक 9 फरवरी से 23 मार्च, 2023 तक भारत और नेपाल स्थित पवित्र बौद्ध स्थलों के 43 दिनों की यात्रा पर रहेंगे। 'ओह, वी! ओह लव! ओह, लाइफ!’ के नारे के साथ सांगवोल सोसायटी द्वारा आयोजित तीर्थयात्रा का उद्देश्य भारत की तीर्थयात्रा के माध्यम से भक्ति संबंधी गतिविधियों की बौद्ध संस्कृति का प्रसार करना है, जहां बुद्ध का जीवन और पदचिह्न संरक्षित हैं।

भारत में कोरिया गणराज्य के राजदूत श्री चांग जे-बोक ने कहा कि वर्ष 2023 देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए विशेष है, क्योंकि दोनों देश राजनयिक संबंधों के 50 वर्षों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर भारत की जी-20 की अध्यक्षता के साथ-साथ आया है और दक्षिण कोरिया जी-20 में भारत की सफलता के लिए प्रतिबद्ध है। राजदूत ने यह भी कहा कि बौद्ध शिक्षाएं भारत की जी-20 की अध्यक्षता के आदर्श वाक्य 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के अनुरूप है।

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच धार्मिक संबंधों पर राजदूत ने कहा कि यह मजबूत भावनाओं को जागृत करता है और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने वाले दोनों देशों के लोगों के बीच अपार सद्भावना पैदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर साल हजारों पर्यटक कोरिया से भारत आते हैं और इस पैदल यात्रा की मेजबानी कोरियाई बौद्ध धर्म के जोगे ऑर्डर द्वारा की जा रही है। पैदल यात्रा वाराणसी के सारनाथ से शुरू होगी और नेपाल होते हुए श्रावस्ती में समाप्त होगी।

इस आयोजन के महत्व के बारे में मीडिया को सूचित करते हुए, राजदूत ने कहा कि मेगा बौद्ध तीर्थयात्रा हमारी साझी बौद्ध विरासत के लिए एक उपयुक्त सम्मान है। यह लोगों के बीच संपर्क को और गहरा करने में काफी मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों में भिक्षु शामिल होंगे, जो :-

1. आठ प्रमुख बौद्ध पवित्र स्थलों को नमन करेंगे,

2. भारतीय बौद्ध धर्म और संस्कृति से अवगत होंगे, और धार्मिक नेताओं की द्विपक्षीय बैठक होगी और

3. विश्व शांति के लिए प्रार्थना सभा और जीवन की गरिमा के लिए आशीर्वाद समारोह आयोजित करेंगे।
 

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