यूनिसेफ झारखंड ने नवभारत जागृति केंद्र के सहयोग से आज बाल अधिकार पर जागरूकता को लेकर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन रांची के होटल होली डे होम में आयोजित किया। कार्यशाला में रांची के 7 प्रखंडों के 70 स्कूलों के 80 शिक्षकों एवं बीईईओ/बीपीओ के अलावा, आनलाइन माध्यम से भी रांची के विभिन्न सरकारी स्कूलों के लगभग 70 शिक्षकों ने भाग लिया। 

इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं प्रतिभागियों को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना था, ताकि बच्चों को इसके अनुरूप अधिकार प्रदान करने में शिक्षक अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें। 

इसके अलावा, शिक्षकों को स्कूलों में सक्रिय बाल संसद की स्थापना, बच्चों में स्वस्थ आहार की आदतें, गैर-संचारी बीमारियों का बच्चों एवं किशोर-किशोरियों पर प्रभाव, बाल संरक्षण के मुद्दे, पाॅक्सो एक्ट के प्रावधानों तथा स्कूलों में आपातकालीन सुरक्षा की तैयारियों के बारे विस्तार पूर्वक जानकारी यूनिसेफ के विशेषज्ञों की ओर से दी गई।  

कार्यशाला का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (यूएनसीआरसी), स्कूलों में सक्रिय बाल कैबिनेट की स्थापना, स्वस्थ आहार को बढ़ावा देना, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) को संबोधित करना, बाल संरक्षण, स्कूलों में वाश और स्कूल सुरक्षा तैयारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल करके प्रतिभागियों की बाल अधिकारों की समझ को गहरा करना था।  

कार्यक्रम में यूनिसेफ झारखंड के विशेषज्ञों - सुश्री आस्था अलंग, संचार विशेषज्ञ; श्रीमती पारुल शर्मा, शिक्षा विशेषज्ञ; श्री दिगंबर शर्मा, पोषण अधिकारी; डॉ. राहुल कापसे, स्वास्थ्य अधिकारी; श्री कुमार प्रेमचंद, जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ; सुश्री लक्ष्मी सक्सेना, जल एवं स्वच्छता अधिकारी तथा श्री गौरव, बाल संरक्षण अधिकारी (एनयूएनवी) ने प्रतिभागियों को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा आदि के मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की तथा अपना अनुभव साझाा किया। इनके अलावा, नवभारत जागृति केंद्र के श्री गिरिजा सतीश ने भी कार्यशाला में भाग लिया। 

कार्यशाला को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यूनिसेफ की प्रमुख, डा. कनीनिका मित्र ने बच्चों के विकास में शिक्षकों के भूमिका और महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि ‘‘बच्चों के लिए शिक्षक की भूमिका माता-पिता के समान है। उन्हें बच्चों की सुरक्षा और उनके बेहतर हितों को सर्वोपरी रखते हुए अपनी जिम्मेवारियों का निर्वहन करना चाहिए। 

आज की यह कार्यशाला शिक्षकों को बाल अधिकार के मुद्दों पर एक विशेष अंर्तदृष्टि प्रदान करेगी, जिसके माध्यम से वे न केवल खुद बाल अधिकार क मुददों के बारे में जानेंगे, बल्कि बच्चों को भी इसे बेहतर तरीके से समझने में उनकी मदद करेंगे, ताकि वे बाल अधिकार के मुद्दों के बारे में दूसरों को भी जागरूक कर सकें और अपने अधिकारों को लेकर चर्चा कर सकें। 

कार्यशाला का लक्ष्य बच्चे के अधिकारों को बढ़ावा देने और उन अधिकारों रक्षा करने और प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित शिक्षकों का एक समुदाय बनाना था। इस अवसर पर सामूहिक गतिविधि एवं परिचर्चा के माध्यम से शिक्षकों ने भी अपनी जानकारी और अनुभवों को साझा किया।

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