करके "एकान्टिबिलिटि ऑफ इन्डिपेन्डेन्ट जुडिशियरी" विषयक प्रस्ताव की प्रति समर्पित करके उसे महामहिम राष्ट्रपति महोदया और भारत के मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित करने का अनुरोध किया । उक्त प्रस्ताव को अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद ने विगत 13.04.2025 को विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में संपन्न राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में पारित की थी । 

 

उक्त प्रतिनिधिमंडल में झारखण्ड बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेन्द्र कृष्ण, उच्च न्यायालय इकाई के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार कश्यप, प्रशान्त विद्यार्थी, रीतेश कुमार बाॅबी, कृष्ण गोपाल निताई, किरण सुषमा खोया, राधाकृष्ण गुप्ता व रोमित कुमार शामिल थे ।
 

उक्त प्रस्ताव की प्रतियां राज्य के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों - उपायुक्तों एवं आयुक्तों को ज्ञापन स्वरूप दिया गया l पारित प्रस्ताव में 10 सूत्री मांगें रखी गईं हैं जिसमें प्रमुख रुप से न्यायिक सुधार करते हुए न्यायिक सेवा में नियुक्ति को और पारदर्शी बनाने हेतु नया विधेयक लाया जाए । 

 

जब तक नया कानून न बने तब तक वर्तमान काॅलेजियम जारी रखा जा सकता है । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक स्थायी समिति पूर्व मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश व विख्यात ब्यक्ति को शामिल करके न्यायालय के कार्यों पर जिम्मेदारियों को देखने की बनाई जाए । 

 

अगर तत्काल उक्त समिति नहीं बनाई जा सकती है, तो लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में उसे लाया जाए। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रिश्तेदार व परिवार के सदस्य जहां वकालत करते हों , वहां से उनका स्थानांतरण हो ।अगर सर्वोच्च न्यायालय के रिश्तेदार का मामला हो तो उनके अवकाश प्राप्ति तक वकालत न करें l 

 

अवकाश प्राप्त होने के उपरांत तीन वर्षों का कुलिंग पीरियड हो l दोनों शीर्ष न्यायालय में अवकाश ग्रहण करने की उम्रसीमा एक समान हो । सर्वोच्च व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश व उनके परिवार के सदस्य गण , प्रत्येक वर्ष अपनी सम्पत्तियों का विवरण वेबसाइट पर डालें । प्रत्येक उच्च न्यायालय मे कम से कम एक तिहाई न्यायाधीश दूसरे उच्च न्यायालय से हों ।


प्रस्ताव की प्रति प्राप्त करते हुए महामहिम राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त की एवं उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया l यह जानकारी झारखंड अधिवक्ता परिषद के प्रांत मीडिया सह प्रमुख श्री रीतेश कुमार बॉबी के द्वारा दी गई l

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