अधिवक्ता परिषद झारखण्ड के तत्वावधान में रांची महानगर इकाई द्वारा संविधान दिवस सह अधिवक्ता दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन छोटानागपुर विधि महाविद्यालय, नामकुम, रांची में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर “संविधान @ 75” विषय पर विस्तृत एवं सारगर्भित चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण (सेवानिवृत्त), पूर्व सदस्य सशस्त्र बल न्यायाधिकरण एवं पूर्व आर्मी कमांडर सह कर्नल कमांडेंट महार रेजिमेंट ने कहा कि संविधान की कानूनी भाषा आम नागरिकों के लिए सहज नहीं होती। इसे सरल भाषा में समझाने का कार्य अधिवक्ता प्रभावी रूप से करते हैं, जिसमें अधिवक्ता परिषद के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर आम नागरिकों को संविधान के नियमों और मूल्यों से अवगत कराएं, ताकि वे उत्तरदायी, शिष्ट एवं अनुशासित नागरिक बन सकें।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छोटानागपुर विधि महाविद्यालय के प्राचार्य श्री पंकज चतुर्वेदी ने संविधान निर्माण में झारखण्ड के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि संविधान सभा में माननीय जयपाल सिंह मुंडा, विनोदानंद झा, बिपिन सोय सहित राज्य के कई महान व्यक्तित्व शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है, जो समानता, न्याय और गरिमामय जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है। वर्तमान समय में सामाजिक न्याय की अवधारणा और भी प्रासंगिक हो गई है।

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झारखण्ड विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष श्री राजेंद्र कृष्णा ने कहा कि संविधान की रक्षा में अधिवक्ताओं का योगदान ऐतिहासिक रहा है और भविष्य में भी यह भूमिका निरंतर बनी रहेगी। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अनिल कश्यप ने युवा अधिवक्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए संविधान के दायरे में रहकर राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी पर बल दिया।

असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया श्री प्रशांत पल्लव ने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान संविधान निर्माताओं को हजारों वर्षों के सांस्कृतिक इतिहास, मुगल आक्रांताओं की बर्बरता और अंग्रेजों की “फूट डालो, राज करो” नीति को ध्यान में रखते हुए अत्यंत कठिन परिश्रम करना पड़ा। अतः अधिवक्ताओं का कर्तव्य है कि वे एकजुट होकर संविधान की रक्षा करें।

उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्य श्री मनोज टंडन ने संविधान के विभिन्न पहलुओं, कॉलेजियम सिस्टम तथा आरक्षण की उपयोगिता एवं कमियों पर उदाहरण सहित प्रकाश डाला। इससे पूर्व प्रान्त सचिव श्रीमती किरण सुषमा खोया ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के गठन, उद्देश्य एवं कार्यों की जानकारी दी। मंच संचालन प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती नीता कृष्णा ने किया, जबकि वंदे मातरम् का गायन श्रीमती इंदु परासर एवं उनकी टीम ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ता परिषद झारखण्ड के प्रांतीय अध्यक्ष श्री प्रशांत विद्यार्थी ने उपस्थित सभी अधिवक्ताओं, वक्ताओं एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर समाजसेवी, वरीय अधिवक्ता, पूर्व महाधिवक्ता, बार काउंसिल के सदस्य, राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ एवं युवा अधिवक्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम की जानकारी झारखण्ड अधिवक्ता परिषद के प्रान्त मीडिया सह प्रमुख श्री रीतेश कुमार बॉबी ने दी।

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