आज चुनावी प्रचार का अंतिम दिन है, शाम के बाद भोंपू बंद हो जाएगा। इस बार बहुत लोगों को देखा आप लोगों ने लंबा-लंबा, बड़ा-बड़ा वादा करते हुए, लेकिन 3 महीने पहले यह लोग कहां थे यह जरूर देखिएगा।

क्या पिछले 2 वर्षों से लगातार आपके क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं, जबसे वार्ड पार्षद का कार्यकाल खत्म हुआ है*

इसलिए अपना आने वाला 5 वर्षों को सोचकर ही सही उम्मीदवार को वोट कीजिएगा *Vote जरूर कीजिएगा*

क्योंकि सही आदमी आएगा तो काम करेगा वरना फिर गलत आदमी को चुन लीजिएगा तो *बरसात में जल-जमाव, गंदगी, नाली दुर्घटना, खराब स्ट्रीट लाइट से अंधेरी गलियां, खेलने के लिए मैदान का अभाव, घूमने के लिए पार्क का अभाव, तालाब और जल स्रोत से बदबू एवं गंदगी और जलकुंभी, पीने का पानी का दिक्कत और टैंकर के भरोसे जिंदगी जीने को मजबूर रहिएगा।

झारखंड में नगर निकाय चुनाव ईवीएम से नहीं बल्कि बैलेट पेपर से होंगे ।राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि राज्य में पहली बार नगर निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएंगे. 

आयोग के इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों से लेकर प्रशासनिक अमले तक में चर्चा तेज हो गई.अब तक झारखंड में जब भी नगर निकाय चुनाव हुए हैं, उनमें ईवीएम का ही इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं.

राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि ईवीएम की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने के कारण यह फैसला लेना पड़ा. आयोग को जितनी संख्या में ईवीएम की जरूरत है, उतनी मशीनें राज्य में मौजूद नहीं हैं.

इसके लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन बिहार सहित पड़ोसी राज्यों ने ईवीएम उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी है. वहीं, ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने भी नई मशीनें उपलब्ध कराने के लिए कम से कम एक साल का समय मांगा है.

अलग-अलग रंग के बैलेट पेपर इन्हीं कारणों को देखते हुए आयोग ने नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला किया है. राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पूरी तैयारी की जा रही है. नगर निकाय चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए अलग रंग के बैलेट पेपर होंगे.

अध्यक्ष पद के लिए एक रंग का बैलेट पेपर रहेगा, जबकि वार्ड सदस्य के लिए दूसरे रंग का बैलेट पेपर दिया जाएगा. मतदाताओं को मतदान के दौरान दो बैलेट पेपर मिलेंगे और उन्हें अलग-अलग बैलेट बॉक्स में डालना होगा.

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