
झारखंड के धनबाद जिले के किसान श्री निरापदो गोराई ने अपने 3 एकड़ के खेत में मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों को अपनाया। इससे पहले, उनकी पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियां मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस पर निर्भर थीं, जिसमें अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग सीमित था।
मृदा स्वास्थ्य परामर्श के आधार पर, वे पोटाश और चूने सहित संतुलित उर्वरक अनुप्रयोग की ओर बढ़े। उन्होंने फसल वृद्धि के विभिन्न चरणों में यूरिया की विभाजित खुराक (स्प्लिट डोज) भी लागू की।
इस बदलाव से उर्वरक की लागत 1,910 रुपये से घटकर 1,190 रुपये प्रति एकड़ हो गई, जिससे 720 रुपये प्रति एकड़ की बचत हुई। इसके साथ ही, धान की पैदावार 1,000 किग्रा से बढ़कर 1,320 किग्रा प्रति एकड़ हो गई और पौधों के स्वास्थ्य में भी सुधार दिखाई दिया।
इस बदलाव पर अपने अनुभव साझा करते हुए, उन्होंने बीमारियों और कीटों के प्रकोप में कमी महसूस की। उन्होंने पाया कि यह संभवतः नाइट्रोजन उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और पोटाश के अनुप्रयोग के कारण था।