माननीय प्रधान मंत्री के 'वाकल फॉर लोकल' आवाह्न की दिशा में, ट्राईफेड द्वारा दिनांक 1 से 15 फरवरी 2021 तक दिल्ली हाट, नई दिल्ली में 'आदि महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है।

जनजातीय महोत्सव का उद्घाटन कल शाम माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू द्वारा श्री अर्जुन मुंडा, माननीय जनजातीय कार्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह, माननीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री; श्री रमेश चंद मीणा, अध्यक्ष, ट्राईफेड; और श्री आर. सुब्रह्मण्यम, सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालय की उपस्थिति में किया गया।

श्री वेंकैया नायडू ने कल 6:30 बजे पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर बोलते हुए. श्री नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि, "आज फिर से राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव यानी ' आदि महोत्सव' का उद्घाटन करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है। 

यह सराहनीय है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राईफेड दल, गत वर्ष की कठिन परिस्थितियों के बावजूद, जनजातीय संस्कृति के इस शानदार उत्सव को फिर से शुरू कर रहे हैं । मैं, दिल्ली के सभी निवासियों से अपील करता हूं कि वे इस 'आदि महोत्सव' में अवश्य आएं और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का आनन्द उठाएं।"

जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने इस समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर बोलते हुए तथा जनजातीय समुदाय के सशक्तीकरण की दिशा में मंत्रालय और ट्राईफेड द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए श्री मुंडा ने कहा कि, "यह वार्षिक उत्सव देश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प तथा सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है और जनजातीय कारीगरों को बड़े बाजारों से जोड़ता है। यहां तक कि यह भारत की जनजातीय विविधता और समृद्धि को भी उजागर करता है।"


यह 'आदि महोत्सव एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2017 में शुरू किया गया था यह उत्सव पूरे देश के जनजातीय समुदायों की समृद्ध तथा विविध शिल्प और संस्कृति से लोगों को एक ही स्थान पर परिचित कराने का एक प्रयास है। हालांकि, महामारी के कारण वर्ष 2020 में इस उत्सव का आयोजन संभव नहीं हो पाया था।


"जनजातीय शिल्प, संस्कृति तथा वाणिज्य की भावना का उत्सव" इस उत्सव का मूल विषय है, जो जनजातीय जीवन के मूल स्वभाव को दर्शाती है। 15-दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में जनजातीय समुदाय द्वारा हाथ से बनाई गई शिल्प वस्तु, कलाकृति, चित्रकारी, परिधान तथा आभूषण 200 से अधिक स्टालों पर की प्रदर्शनी व बिक्री के लिए लगाए गए हैं। महोत्सव में पूरे देश से लगभग 1000 जनजातीय कारीगर और जनजातीय कला समूहों के कलाकार भाग ले रहे हैं।


ट्राईफेड के प्रबंध निदेशक श्री प्रवीर कृष्ण ने आगे बताया कि, "छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के 20 से अधिक राज्यों से आये हुए कलाकार और कारीगर, इस बृहत सांस्कृतिक आयोजन में भाग ले रह हैं, जो अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। "


प्रदर्शित किए जा रहे जनजातीय प्राकृतिक उत्पाद, जनजातीय हस्तशिल्प कलाकृति, जनजातीय व्यंजन और जनजातीय संस्कृति इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण हैं पर्यटक यहां पर, मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध माहेश्वरी साड़ियों से लेकर लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश के गर्म ऊनी वस्त्र, तमिलनाडु के जनजातीय लोगों द्वारा संग्रहित विभिन्न प्रतिरक्षाकर्धक जड़ी-बूटियों व मसालों से लेकर पूर्वोत्तर भारत के विशिष्ट शहद व जैविक उत्पाद प्रसिद्ध टोडा एम्ब्रोइड्री से लेकर असम की मोगा रेशम और नागालैंड के काली मिट्टी के बर्तन, के सर्वोत्तम उत्पादों को जहां एक तरफ देख सकते हैं वहीं उन्हें खरीद भी सकते हैं यह उत्सव एक ही जगह पर एक ही छत के नीचे पूरे भारत की एक संक्षिप्त छवि को दर्शाता है।


उत्सव में, पर्यटक जहां एक तरफ पूरे देश से आये जनजातीय कलाकारों का शानदार प्रदर्शन देख सकते हैं, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न हिस्सों के उत्कृष्ट व्यंजनों जैसे झारखंड की दाल पीठ, दूसका, चिल्का रोटी, महाराष्ट्र की गुरूड़ी, ज्वार पापड़ तथा महालपत्ता पर रोटी, तमिलनाडु की समई उरुंदई, रागी कली और तेनाई चावल और नागालैंड के पोर्क व्यंजन: आदि का आनंद भी ले सकते हैं। उत्सव का उद्देश्य है समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विविधता को उनके अभी तक अप्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाकृतियों का प्रदर्शन कर दुनियां के सामने प्रस्तुत करना।


माननीय प्रधान मंत्री के वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण जैसे मूलमंत्रों पर जोर देते हुए. इस उत्सव का उद्देश्य भारतीय समाज के इस सर्वाधिक वंचित वर्ग की समृद्ध कलाकृतियों और परंपराओं को सामने लाना और उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करना है।

ट्राईफेड, जनजातीय सशक्तीकरण की दिशा में कार्यरत नोडल एजेंसी के रूप में कई पहलों का संचालन कर रहा है, जो जनजातीय समुदाय के जीवन मूल्यों तथा परंपराओं को संरक्षित रखते हुए उनकी आय और आजीविका को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। 'आदि महोत्सव' एक ऐसी ही पहल है जो इस समुदाय को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और उन्हें मुख्यधारा के विकास के करीब लाने में मदद करती है।
 

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