राज्यसभा चुनाव मामले से जुड़े एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। दरअसल, अनुराग गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका में राज्यसभा से जुड़े मामले में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में प्राथमिकी बहुत देर से दर्ज की गई है और उन्हें निलंबित हुए लगभग एक साल होने वाले हैं। उनकी ओर से अदालत से अंतरिम राहत की मांग की गई। लेकिन अदालत ने कहा कि यह जमानतदार मामला है और वादी पुलिस बेल पर हैं। ऐसे में अंतरिम राहत की कोई जरूरत नहीं है। अब इस मामले में चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी।


एडीजी अनुराग गुप्ता लगभग 11 महीने से सस्पेंड हैं। 14 फरवरी 2020 को हेमंत सरकार ने एडीजी अनुराग गुप्ता को निलंबित कर दिया था। तब वे सीआइडी के एडीजी थे। उनके खिलाफ राज्यसभा चुनाव 2016 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के लिए बड़कागांव की तत्कालीन विधायक निर्मला देवी को लालच देने और उनके पति पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकाने का आरोप है।


2016 में राज्यसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक ऑडियो टेप जारी किया था। इस कथित टेप में एडीजी अनुराग गुप्ता, तत्कालीन विधायक निर्मला देवी, उनके पति योगेंद्र साव के बीच बातचीत की बात सामने आई थी। मामला सामने आने के बाद पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी।

प्रथम दृष्टया जांच के बाद आयोग ने एफआईआर का आदेश दिया था। गृह विभाग के अवर सचिव अवधेश ठाकुर के बयान पर सरकार ने तब मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में फरवरी महीने में अनुराग गुप्ता के निलंबन के बाद राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू की थी जिसके संचालन का जिम्मा डीजीपी एमवी राव को दिया गया था।

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