सड़क दुर्घटना में 18 से 35 वर्ष के बीच के युवा जान गवां रहें हैं। यह चिंतनीय है। हमें इसपर ध्यान केंद्रित करना है और इसका समाधान ढूंढना है। ओवरस्पीड पर विराम आवश्यक है, सड़क हादसों को रोकने में मददगार बनें। गति सीमा पर विशेष ध्यान दें। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों पर मंथन के दौरान उपरोक्त बातें कही।

राज्य सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, झारखण्ड में सड़क दुर्घटना में प्रतिदिन औसतन 10 लोग जान गंवाते हैं। जान गंवाने वालों में से 10 प्रतिशत पैदल चलने वाले और सात प्रतिशत साइकिल सवार हैं। वर्ष 2020 की स्थिति पर गौर करें तो कुल 4377 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 3303 लोग घायल हुए और 3044 लोगों ने जान गवाई है। 92 प्रतिशत दुर्घटना सिर्फ ओवर स्पीड की वजह से हुईं। दो प्रतिशत दुर्घटनाएं नशे में, गलत दिशा में वाहन चलाने से चार प्रतिशत, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करने और लाल बत्ती क्रॉस करने पर एक प्रतिशत लोग हादसे के शिकार हुए हैं। वर्ष 2020 में सड़क दुर्घटना के मामले में खूंटी पहला, रांची दूसरा और गुमला तीसरा स्थान रखता है, जबकि गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में सबसे कम सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं।

*दोपहिया वाहन से हुए सर्वाधिक हादसे*

अक्सर देखा जाता है कि एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की रफ्तार काफी तेज होती है और सड़क दुर्घटना की आशंका अधिक बढ़ जाती हैं। लेकिन वर्ष 2020 में मात्र एक प्रतिशत हादसे एक्सप्रेस-वे पर हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग में 39 प्रतिशत, राज्य उच्च पथ पर 18 प्रतिशत दुर्घटनाएं दर्ज की गयी। अन्य सड़कों पर हुई क्षेत्रवार हादसों का विश्लेषण किया जाए तो रेजिडेंशियल क्षेत्र में 24 प्रतिशत, शैक्षणिक क्षेत्र में दो प्रतिशत, मार्केट एरिया में 19 प्रतिशत और सर्वाधिक 55 प्रतिशत हादसे अन्य क्षेत्र में हुई। सबसे अधिक 63 प्रतिशत हादसे सीधी सड़कों पर हुए हैं। वर्ष 2020 में दो पहिया वाहन के 39 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। कार, जीप, वैन और टैक्सी से 18 प्रतिशत और ट्रक से 16 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं।

*हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं*

जीवन सुरक्षा हेतु वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग अवश्य करें। राज्य सड़क सुरक्षा परिषद द्वारा किये गए विश्लेषण के अनुसार सुरक्षा मानकों पर ध्यान दिया जाए तो हेलमेट पहनने के बाद दुर्घटना में जान गंवाने की संभावना 14 प्रतिशत ही रहती है, जबकि नहीं पहनने की स्थिति में 86 प्रतिशत जान गंवाने की संभावना रहती है। सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाने से 22 प्रतिशत मामलों में जान जाने और सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 78 प्रतिशत जान जाने की संभावना होती है।

*आप की सुरक्षा के लिए सजग सरकार*

राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद पहुंचाने हेतु नेक नागरिक से संबंधित नीति काफी कारगर होगी। इसे लागू कराने से सम्बन्धित नियमावली को मंत्रिपरिषद से स्वीकृति प्राप्त है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में हो रही सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति की सहायता के लिए नेक नागरिक वॉलेंटियर्स टीम का गठन किया जाना है। नेक नागरिक स्वंय सहायता समूह बनाकर प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करायी जायेगी।

*जागरूकता भी है जरूरी*

सड़क सुरक्षा विषय को छठी, सातवीं और आठवीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सम्मिलित करने पर सरकार विचार कर रही है। साथ ही, मध्य विद्यालयों, उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों एवं उच्च विद्यालयों में एक सड़क सुरक्षा नोडल शिक्षक की प्रतिनियुक्ति करने की योजना है। लोगों को सड़क दुर्घटना से बचाने एवं जागरूकता हेतु 16913 साइन बोर्ड, 4271 गति सीमा एवं 75996 सूचनाओं से संबंधित साइनऐज लगाया जा चुका है। एनएच, राज्य पथ और जिलों की सड़कों से मिलने वाले जंक्शन पर 188 पीला ब्लिंकर स्टैंड लगाए जा चुके हैं। 260 जगहों पर पीला ब्लिंकर स्टैंड लगाने की प्रक्रिया जारी है।

*इलाज की समुचित व्यवस्था का प्रयास भी*

झारखण्ड के सभी जिलों में कम से कम एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण पर सरकार विचार कर रही है। वर्तमान में रिम्स रांची में लेवल-1 का, हजारीबाग गढ़वा का नगर उंटारी, पूर्वी सिंहभूम स्थित बहरागोड़ा और एसडीएच बरही में लेवल तीन का ट्रॉमा सेंटर कार्य कर रहा है, जबकि लेबल तीन के ट्रॉमा सेंटर कोडरमा, लोहरदगा स्थित कुडू, एसडीएच घाटशिला में निर्माणाधीन है।

*एम्फोर्समेंट टीम की तैनाती भी*

यातायात के दबाव वाले जिलों में सरकार विशेष ध्यान दे रही है। रांची, जमशेदपुर, सरायकेला, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो और देवघर में 88 हाईवे पेट्रोल्स और 168 पीसीआर वैन की तैनाती की गई है। ताकि किसी तरह का हादसा होने पर एम्फोर्समेंट टीम मदद करे।

support jharkhand state news

If you value our journalism, consider making a voluntary contribution to help us continue bringing news, stories and information to our readers.

Scan the QR code to contribute

Support Jharkhand State News via UPI

Every contribution, big or small, is appreciated.

must read