*फोटो: प्राची यादव

मुख्य बिंदु:

• भारत के तीन सदस्यीय वॉटर स्पोर्ट्स टीम में दो पुरुष तैराक और एक महिला कैनो स्प्रिंट खिलाड़ी शामिल हैं।

• सुयश जाधव का यह दूसरा पैरालंपिक खेल है जबकि निरंजन मुकुंदन और प्राची यादव पहली बार इन खेलों में हिस्सा ले रही हैं।

• भारत सरकार ने सुयश को विदेशों में खेलने के अवसर संबंधी सहायता दी है।

• निरंजन 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं और वह 50 पदकों का आंकड़ा पार करने वाले एकमात्र पैरा तैराक हैं।

• 26 वर्षीय प्राची यादव पैरालंपिक खेलों की पैरा कैनोइंग प्रतिस्पर्धा में प्रवेश पाने वाली पहली भारतीय हैं।

 

भारत के तीन सदस्यीय वॉटर स्पोर्ट्स टीम में दो पुरुष तैराक और एक महिला कैनो स्प्रिंट खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों को भरोसा है कि वे टोक्यो पैरालंपिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सक्षम होंगे। सुयश जाधव का यह दूसरा पैरालंपिक खेल है जबकि निरंजन मुकुंदन और प्राची यादव पहली बार पैरालंपिक खेलों में हिस्सा ले रहे हैं। तीनों खिलाड़ी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) का हिस्सा हैं।

जकार्ता में 2018 एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 50 मीटर बटरफ्लाई एस7 (32.71 सेकंड) में जीत के साथ सुयश जाधव ने टोक्यो पैरालिंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। साथ ही जकार्ता में पुरुषों की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 (2:51.39) में कांस्य पदक के साथ भी उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक खेलों की इस स्पर्धा के लिए क्वालीफाई किया है।

*तस्वीर: सुयश जाधव

इस समय पुणे में खेल एवं युवा मामलों के निदेशालय, महाराष्ट्र में एक तैराकी कोच के रूप में कार्यरत सुयश अपने कोच तपन पाणिग्रही की देखरेख में बालेवाड़ी स्टेडियम में प्रशिक्षण लेते रहे हैं। उन्हें भारत सरकार ने विदेशों में खेलने के अवसर संबंधी सहायता प्रदान की जिसके साथ उन्होंने पांच से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उन्हें खेल किट और खेल विज्ञान संबंधी सहायता के साथ राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने का भी मौका दिया गया। 11 साल की उम्र में बिजली का झटका लगने के बाद सुयश के हाथों को शरीर से अलग करना पड़ा था। 2016 के पैरालंपिक खेलों के बाद, उन्होंने 2018 में इंडोनेशिया में एशियाई पैरा खेलों में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीते। उन्हें 2018 में एकलव्य पुरस्कार और 2020 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

जहां सुयश की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले एसएम7 प्रतिस्पर्धा 27 अगस्त को होनी है, वहीं वह 3 सितंबर को पुरुषों की 50 मीटर बटरफ्लाई एस7 प्रतिस्पर्धा में फिर से निरंजन मुकुंदन के साथ उतरेंगे। रिकॉर्ड की बात करें तो मुरलीकांत पेटकर हाइडिलबर्ग, जर्मनी में 50 मीटर फ्रीस्टाइल में स्वर्ण पदक जीतकर एक पैरालंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

इस महीने की शुरुआत में, 26 वर्षीय बैंकर निरंजन को इंटरनेशनल पैरालंपिक समिति द्वारा खेलों में द्विदलीय स्थान आवंटित किया गया था। वह 60 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं और 50 पदक के आंकड़े को पार करने वाले एक मात्र पैरा तैराक हैं। निरंजन को विदेश में तैयारी से जुड़ी यात्राओं के साथ खेल विज्ञान समर्थन और राष्ट्रीय कोचिंग शिविरों में भागीदारी के रूप में सरकार से सहायता मिल चुकी है।

*फोटो: निरंजन

स्पाइनल बाइफिडा और क्लब्ड फीट के साथ जन्मे, निरंजन पैरालंपिक में अपनी छाप छोड़ने को उत्सुक हैं, उन्होंने अपनी दादी को खोने के कुछ महीने के बाद कोविड-19 पॉजिटिव होने के बावजूद महामारी के दौरान बंगलुरू में जॉन क्रिस्टोफर से प्रशिक्षण हासिल किया। 

इसके अलावा, 26 वर्षीय प्राची यादव पैरालंपिक गेम्स पैरा कैनोइंग प्रतिस्पर्धा में प्रवेश हासिल करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। वह 2 सितंबर को महिलाओं की वीएल2 200 मीटर हीट्स में भाग लेंगी, उसके अगले दिन सेमी फाइनल और फाइनल होंगे। मई 2019 में पोजनैन, पोलैंड में हुए आईसीएफ पैरा कैनो वर्ल्ड कप में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगाज करते हुए, वह पहले राउंड और सेमी फाइनल से आगे निकलते हुए आठवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद, अगस्त 2019 में जेगेड, हंगरी में हुई आईसीएफ पैरा कैनो वर्ल्ड चैम्पियनशिप वह सेमीफाइनल तक पहुंची थीं।

भोपाल में लो लेक में मयंक सिंह ठाकुर के अंतर्गत प्रशिक्षण हासिल करने वाली प्राची को भारत सरकार से अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं और खेल विज्ञान समर्थन व किट्स के साथ राष्ट्रीय कोचिंग कैम्प में भागीदारी के रूप में सहायता मिली है। वह कमर के नीचे शारीरिक रूप से अक्षम हैं।

support jharkhand state news

If you value our journalism, consider making a voluntary contribution to help us continue bringing news, stories and information to our readers.

Scan the QR code to contribute

Support Jharkhand State News via UPI

Every contribution, big or small, is appreciated.

must read