Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act was the Centre’s scheme to pave the way for economic development and ensure social justice,said Governor Syed Ahmad today.

Governor Ahmad was speaking in a meeting on MNREGA held at Administrative Training Institute in Ranchi.

A press release issued by the public relations department in Hindi provided his speech.In brief it said as follows:
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ग्रामीण भारत के विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर कर्इ विकास तथा रोजगारपरक योजनायें चलार्इ गर्इ। इन कार्यक्रमों का मूल मकसद आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय सुनिषिचत करना था। नरेगा भी इसी क्रम में एक प्रयास है। अकुषल श्रमिकोंमजदूरों के लिए रोजगार सुनिषिचत करने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (नरेगा) पारित किया गया। आन्ध्र प्रदेष के अनंतपुर जिल से 2 फरवरी 2006 को इस योजना की शुरूआत की गर्इ। 2 अक्टूबर 2009 को बापू की 140वीं जयंती पर प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह ने इसका नया नामकरण किया। अब नरेगा को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम से पुकारा जाता है।

मनरेगा लोगों के जीवन-स्तर में सुधार लाने हेतु केन्द्र सरकार की एक बेहतर योजना है जिसका मुख्य मकसद ग्रामीण बेरोजगारों को एक विŸà¤¾à¥€à¤¯ वर्ष में 100 दिनों तक का रोजगार मुहैया कराकर उनको लाभ पहुँचाना है। मनरेगा कर्इ मायनों में दूसरी सरकारी योजनाओं से अलग है। यह ग्रामीण बेरोजगारों को सीधे फायदा पहुँचाता है। मनरेगा के तहत गाँवों में ऐसी परियोजनायें चलार्इ जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों को घर के पास ही रोजगार तो मिल ही रहा है, साथ ही गाँवों का विकास भी हो रहा है।

मनरेगा के प्रावधानों के अनुरूप योजना के कार्यान्वयन की सुनिषिचतता के मानिटरिंग हेतु झारखण्ड राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया गया है। दिनांक 27.09.2011 के बाद आज यह बैठक हो रही है, जिसमें बहुत से विषेषज्ञों ने भी षिरकत की है।

मेरा स्पष्ट कहना है कि लोगों के जीवन-स्तर को बेहतर बनानेवाली इस योजना के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की षिथिलता व लापरवाही नहीं होनी चाहिये। गरीबों की तरक्की से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना के साथ खिलवाड़ करने वालों को मैं तो क्या भगवान भी कदाचित माफ नहीं करेंगे।
मैं चिंतित हूँ कि मनरेगा अंतर्गत ली गर्इ योजनाओं में से काफी योजनायें अधूरी हैं। जब राषि की कमी नहीं, तो योजनायें अधूरी क्यों रह रही है? हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत एवं उत्पादक सरंचनाओं को बढ़ाने का काम भी करता है। मेरा मानना है कि योजनाओं को पूरा करने के हरसंभव प्रयास किये जाने चाहिये।

मनरेगा में श्रम बजट की राषि में हाल में कोर्इ वृद्धि नहीं देखी गर्इ है, जबकि राज्य से पलायन की खबरें लगातार छपती रहती है। मनरेगा कार्यक्रम के रहते पलायन होना अटपटा लगता है। हमें इसका कारण ढूँढ़ना चाहिये, ताकि लोग इसके माध्यम से अपने ही इलाके में रोजगार प्राप्त कर सकें।

पूरे मनरेगा इको-सिस्टम में मपिबपमदबल लाने की जरूरत है, चाहे वो योजनाओं की पहचान हो या स्वीकृति, मापी हो या अगि्रम प्रतिवेदन, प्रतिवेदन प्रेषण अथवा षिकायत निवारण। हर समअमस पर इसे ंततंदहम किया जाना चाहिये एवं कैसे और ज्यादा दक्षता से कार्य किया जा सकता है, इस दिषा में कार्य करना चाहिये।

मनरेगा में देर से भुगतान मिलना एक समस्या है। म्थ्डै की योजना से भुगतान में विलम्ब समाप्त होगा। आधार का प्रयोग कर एवं ठनेपदमेे ब्वततमेचवदकमदज के जरिये भुगतान तीव्र गति से किया जा सकता है।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेष जी भी राज्य में इस योजना का अच्छी तरह से कार्यान्वयन हो, इस हेतु पूर्णत: प्रयास कर रहे हैं।

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