रांची स्थित राजभवन को शनिवार को विश्व बाल दिवसके अवसर पर नीले प्रकाश से रोशन किया गया। यह यूनिसेफ द्वारा मनाएजा रहे बाल अधिकार समझौता की 32 वीं वर्षगांठ को मनाने तथा बालअधिकारों को समर्थन देने के उद्देश्य से किया गया।

 बाल अधिकारसमझौता मानव अधिकार के इतिहास में सबसे बड़ी मानवाधिकार संधिहै] जिस पर भारत ने भी वर्ष 1992 में दस्तखत किए हैं। विश्व बाल दिवसहर वर्ष 20 नवंबर को मनाया जाता है] जिसका उद्देश्य उन लाखों बच्चों केलिए जागरूकता बढ़ाना है, जो पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, शिक्षातथा सुरक्षा के अधिकार से वंचित हैं।

विश्व बाल दिवस को लेकर राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में, माननीयराज्यपाल श्री रमेश बैस ने बच्चों से बातचीत की और उनके द्वारा बालअधिकारों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों तथा उनकी समस्याओंएवं चुनौतियों के बारे में जाना। इस अवसर पर राजभवन में बच्चों के बीचएक चित्रांकन प्रतियोगिता "रिइमेजनिंग द फ्यूचर इन अ पोस्ट कोविडवल्र्ड" आयोजित की गई, जिसमें 30 बच्चों ने भाग लिया।

बच्चों को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल श्री रमेश बैस ने कहा, हमारे बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हर बच्चा में कोई न कोई प्रतिभा होती है। आवश्यक है उनमें निहित प्रतिभा को निखारने की ताकि हमारे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को उनके अधिकार मिले, वे पढाई करे और उन्नति करें। आज बहुत से परिवार अर्थाभाव के कारण बच्चों को मजदूरी के लिये भेज देते हैं, शिक्षा से वंचित रखते हैं, इस दिशा में हम सभी को ध्यान देने की जरूरत है।

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​माननीय राज्यपाल ने कहा कि कोरोना के पालन करने के लिए सरकार द्वारा कई नियम बनाये गए हैं। सरकार कोई भी नियम जनता के लिये ही बनाती है। कोरोना की भयावह को वही जानता है जिनके परिवार के किसी  सदस्य को कोरोना हुआ है। किसी ने अपने परिवार के सदस्य को खोया भी। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को कोरोना के नियमों का पालन स्वयं के लिए करें। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों ने लम्बे अंतराल तक ऑनलाइन पढ़ाई की। आज विश्व बाल दिवस के अवसर पर बच्चों ने राज भवन में यूनिसेफ द्वारा आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता “रिइमेजनिंग द फ्यूचर इन अ पोस्ट कोविड वर्ल्ड" में बेहतर पेंटिंग प्रस्तुत कर सबको आकर्षित किया। राज्यपाल महोदय ने सभी बच्चों के पेंटिंग को देखकर संवाद स्थापित केरते हुए विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने बाल पत्रकारों के मनोबल बढ़ाते हुए उनके मध्य प्रमाण पत्र वितरित किये। 

​राज्यपाल महोदय ने बाल पत्रकारों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि कोरोनाकाल ने लोगों को चुनौती में जीना सिखाया। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और हम वासुधैव कुटुम्बकम की राह पर चलते हैं। इसलिए कहीं भी वाद-विवाद नहीं होना चाहिये। बेहतर माहौल में प्रगति के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए। 

​राज्यपाल महोदय को उक्त अवसर पर बाल पत्रकारों द्वारा कोरोना महामारी के दौरान अपनी समस्याओं व चुनौतियों के सदर्भ में अवगत कराय। उन्होंने ऑनलाइन क्लास की समस्या के संदर्भ में अवगत कराते हुए कहा कि स्मार्टफोन का अभाव व नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ा। बाल पत्रकारों ने कहा कि ऑनलाइन क्लास में समझने में भी समस्या होती थी। बच्चों ने कहा कि ऑनलाइन क्लास में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा। स्कूल अब खुल गये हैं लेकिन पूर्व की भाँति अब पढ़ाई नहीं हो पा रही है। बाल पत्रकारों ने कहा कि कोरोना का प्रभाव शिक्षा के साथ उनके मानसिक दशा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। लॉकडाउन में उनके अभिभावक घर के बाहर नहीं जाने देते थे। विद्यालय खुलने के बाद स्थिति में परिवर्तन आया है। बाल पत्रकारों ने विद्यालयों में कोविड टीकाकरण, खेलकूद गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर बल देने हेतु कहा। बाल पत्रकार सृष्टि द्वारा "कोरोना के बाद स्कूल" शीर्षक पर कविता सुनाया गया। प्रीति टोप्पो द्वारा शिक्षा शीर्षक पर कविता सुनाया।  

इस कार्यक्रम में यूनिसेफ के प्रमुख श्री प्रसांता दाश तथा कम्यूनिकेशनआॅफिसर सुश्री आस्था अलंग ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में बोलते हुएश्री प्रसांता दाश ने कहा, "हम सभी जानते हैं कि कोविड-19 महामारीदुनिया भर में व्यवधान का कारण बनी हुई है। विश्व बाल दिवस केअवसर पर माननीय राज्यपाल के द्वारा राजभवन में आयोजित चित्रांकनप्रतियोगिता में भाग लेकर बच्चों ने इन चुनौतियों एवं समस्याओं को अपनीकला के माध्यम से चित्रित किया है। सभी बच्चों के अपने सपने होते हैंऔर उन्हें पूरा करने का भी उन्हें अधिकार है। बच्चों के अधिकारों केसंरक्षक तथा एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में यह सुनिश्चित करना हमसभी का कर्तव्य है कि बच्चे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचे और उनकासंपूर्ण विकास हो।"

इस परिचर्चा का आयोजन यूनिसेफ के सहयोग से किया गया था] जो2009 से बाल पत्रकारों के साथ काम कर रहा है। इस वर्ष यूनिसेफ केद्वारा लगभग 1600 बच्चों की क्षमता का निर्माण किया गया है] जबकिअब तक 30,000 से अधिक बच्चे इस कार्यक्रम से जुड़ चुके हैं।

यूनिसेफकी कम्यूनिकेशन आॅफिसर आस्था अलंग ने इस बारे में बताते हुए कहा, "बच्चों ने पिछले डेढ़ साल में अपने घरों में सीमित सामाजिक जुड़ाव केसाथ बिताए हैं। यह समझने के लिए कि बच्चों की चुनौतियां क्या हैं औरवे क्या चाहते हैं] इस परिचर्चा का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों कोउन महत्वपूर्ण मंचों का हिस्सा बनाकर निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जासके, जहां वे अपनी बात रख सकें।"

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