झारखंड के अपने 3 दिवसीय दौरे के दूसरे चरण में, नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ जी आर चिंताला ने सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम जिलों का भ्रमण किया और दोनों जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया.

नाबार्ड अध्यक्ष ने सरायकेला- खरसावां ज़िले के सरायकेला और खरसावां प्रखंड के 17 गांवों में चलाई जा रही वाडी परियोजना का भ्रमण किया. इस परियोजना में 379 आदिवासी परिवारों को समर्थन प्रदान किया गया है जिसे टीएसआरडीएस द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। उन्होंने लाभार्थियों के साथ बातचीत की और नाबार्ड द्वारा किए गए क्रिया कलापों के प्रभाव की समीक्षा की. उन्होंने विभिन्न विभागों के साथ तालमेल के लिए जिला विकास प्रबंधक के प्रयासों की सराहना भी की। वाडी नाबार्ड की एक फलदार वृक्ष आधारित विकास परियोजना है। नाबार्ड प्रत्येक आदिवासी परिवार को एक एकड़ भूमि में बाग विकास के लिए अनुदान सहायता प्रदान करता है। अन्य सहायता में जल संसाधन विकास, उपयुक्त फसलों के साथ इंटरक्रॉपिंग, वानिकी प्रजातियों के साथ सीमा पर वृक्षारोपण, एसएचजी का गठन और आय अर्जन गतिविधियों के लिए भूमिहीन आदिवासी परिवारों को सहायता शामिल है।

जमशेदपुर में उन्होंने टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्हें टीएसएफ द्वारा की जा रही विकासात्मक पहलों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने टीएसएफ द्वारा की जा रही पहल की सराहना की और सीएसआर के तहत नाबार्ड के साथ कॉरपोरेट्स के सहयोग पर चर्चा की । उन्होंने सिलाई मशीन ऑपरेटर और फूड एंड बेवरेज स्टीवर्ड कोर्स पर टीएसएफ को सीएसआर के तहत स्वीकृत एक कौशल विकास कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया।
 

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रोजगार की संभावना वाले विभिन्न व्यवसायों में ग्रामीण युवाओं को कुशल बनाने के लिए नाबार्ड प्राथमिकता देता है. यह कौशल विकास कार्यक्रमों-एसएमओ, जनरल ड्यूटी असिस्टेंट, अपैरल डिजाइनिंग, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, एम्ब्रॉयडरी, ब्यूटी पार्लर आदि- के माध्यम से किया जाता है। नाबार्ड ने इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों को व्यवस्थित करने के लिए टीएसएफ के साथ साझेदारी किया है ।

उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के पटमदा ब्लॉक के मरचा गांव का भ्रमण किया और विभिन्न कार्यक्रमों के तहत समर्थित उत्पादों के लिए नाबार्ड द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. यात्रा के भ्रमण के दौरान , उन्होंने मरचा गांव में एक वाटरशेड परियोजना और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर एक अभिनव परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन किया। प्रतिभागियों के साथ बातचीत में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की विकासात्मक परियोजना से मिट्टी और पानी का संरक्षण होगा और संसाधनों का इष्टतम उपयोग होगा, जिससे अंततः लाभार्थियों की आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने सरायकेला खरशावां जिले के कटुंगा गांव में घास और बांस शिल्प पर कार्य करने वाले 216 कारीगरों के ऑफ फार्म प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (ओएफपीओ) क्लस्टर के लिए संकुल संसाधन केंद्र की आधारशिला रखी। उन्होंने ओएफपीओ के उत्पादों की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। अपने संबोधन में अध्यक्ष ने संतोष व्यक्त किया कि इस परियोजना से क्षेत्र में एक जीवंत बांस क्लस्टर का निर्माण होगा। क्लस्टर में उच्च गुणवत्ता और उत्तम बांस शिल्प उत्पादों की विविध रेंज के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में विकसित होने की क्षमता है।

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