राज्य में कुपोषण एवं अनीमिया की रोकथाम हेतु पॉच जिलों यथाः चतरा, लातेहार, साहेबगंज, प.सिंहभूम एवं सिमडेगा जिला में समर (Strategic Action for Alleviation of Malnutrition and Anemia Reduction) अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में मुख्य रूप से गंभीर कुपोषण एवं अनीमिया से पीड़ित बच्चों एवं महिलाओं की पहचान की जा रही हैं एवं उनका उपचार किया जायेगा।

सचिव श्री अविनाश कुमार ने बताया कि जो गंभीर कुपोषण एवं अनीमिया से पीड़ित हो चुके हैं, का उपचार चिन्हित कर समर अभियान में किया जा रहा है किन्तु भविष्य में कुपोषण एवं अनीमिया की रोकथाम के लिए हमें पोषण के कुछ ऐसे आदतें अपनाये जाने होंगे जो हमारी आने वाली पीढ़ी कुपोषण एवं अनीमिया की जाल में न फसें।

उन्होंने यह बताया की शिशु के जीवनकाल के पहले सुनहरे 1000 दिन (गर्भधारण से लेकर शिशु के दुसरे जन्मदिन) कितना महत्वूपर्ण है। अगर हमारा समाज, परिवार इन 1000 दिनों का महत्व को समझे एवं अपने आदतों में अपनाये तो यह संभव है कि हमारी आने वाली पीढ़ी को कुपोषण एवं अनीमिया से बचाया जा सकेगा।

कुपोषण एवं अनीमिया की रोकथाम हेतु शिशु के जीवनकाल के पहले सुनहरे 1000 दिन में गर्भवती महिला, धात्री माता एवं बच्चे के पोषण संबंधी क्या ध्यान रखे एवं क्या-क्या किया जाये के बारे में संक्षेप रूप में बताया।

*बच्चों और महिलाओं का हुआ रजिस्ट्रेशन*

मनरेगाआयुक्त श्रीमती राजेश्वरी बी के निर्देश पर जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षक के साथ आंगनबाडी केन्द्र हरिजनटोला एवं रसूलपुर में गर्भवती महिला में खून की कमी का परीक्षण कर बच्चों के वजन का अनुश्रवण कर एसटीसी चिन्हित बच्चों का पंजीयन किया गया।

*पोषण के 5 सूत्र*

*गर्भावस्था-270 दिन*
*पहला वर्ष-365 दिन*
*दूसरा वर्ष 365 दिन*

*जीवन के पहले सुनहरे 1000 दिन...*

■ पहले 1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल बच्चे का पूरा विकास करने में मदद करते हैं।

■ इस समय मां और बच्चे को सही पोषण और खास देखभाल की जरूरत होती है।

*परिवार को यह बातें पता हो और व्यवहार में लाएं*

■ सभी गर्भवती महिला का कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच अवश्य हो
■ सभी गर्भवती महिला (गर्वास्था के चतुर्थ माह से 180 दिन तक) और धात्री माता रोजाना (180 दिन तक) एक आयरन की गोलियों का सेवन करे
■ यदि गर्भवती महिला खून की कमी से पीड़ित हो तो 180 दिन तक रोजाना दो (दोपहर एवं रात) आयरन गोली का सेवन करे
■ सभी गर्भवती महिला (गर्वास्था के चतुर्थ माह से 360 दिन तक) और धात्री माता रोजाना (360 दिन तक) दो कैल्सियम की गोलियों का सेवन करे! याद रखे आयरन एवं कैल्सियम की गोली एक साथ ना खाए !
■ याद रखें शिशु का जन्म अस्पताल में ही हो एवं जल्द से जल्द जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य दें
■ शिशु को 24 घंटे में कम से कम 8 से 12 बार-बार स्तनपान कराये
■ जन्म से 6 माह तक केवल व केवल माँ का दूध दे (पानी, शहद, जन्मघुट्टी आदि कुछ भी न दे)
■ 6 माह होने पर स्तनपान के साथ-साथ उम्र अनुसार ऊपरी आहार की शुरुआत करे
■ बच्चे को पूर्ण नियमित टीकाकरण सुनिश्चित हो
■ बच्चे के 9 माह होने पर उसे प्रत्येक 6 माह पर नियमित विटामिन ए की खुराक दे

*पौष्टिक आहार*

■ सभी उम्र के लोग 6 महीने के बच्चे भी पर्याप्त मात्रा में तरह-तरह का पौष्टिक आहार अवश्य लें
■ विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ खाएं जैसे कि अनाज, दालें हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, चौलाई और सरसों। पीले फल जैसे आम व पका पपीता अवश्य खायें।
■ यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस, मछली आदि लें
■ खाने में दूध, दूध से बने पदार्थ और मेवे आदि शामिल करें
■ अपने खाने में स्थानीय रूप से उत्पादित पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें
■आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाएं
■जब बच्चा 6 महीने का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी शुरू करें जैसे कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, तथा गाढ़ी दाल, दलिया, खिचड़ी आदि। यदि मांसाहारी है तो अंडा मांस और मछली भी दें
■बच्चे के खाने में ऊपर से एक चम्मच घी तेल या मक्खन मिलाएं
■बच्चे के खाने में नमक, चीनी और मसाला कम डालें
■एक खाद्य पदार्थ से शुरू करें धीरे-धीरे खाने में विविधता लाएं। बच्चे का खाना रुचिकर बनाने के लिए अलग अलग स्वाद और रंग शामिल करें।
■बच्चे को बाजार का बिस्कुट चिप्स मिठाई नमकीन और जूस जैसे चीजें नहीं खिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिल पाते।

*खून की कमी*

■स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग के लिए एनीमिया की रोकथाम करें।आयरन से भरपूर आहार खाएं जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मेथी, फल, दूध, दही, पनीर आदि। यदि मांसाहारी है तो अंडा मांस और मछली का भी सेवन करें।
■खाने में नींबू आंवला अमरूद जैसे खट्टे फल शामिल करें जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं।

*आयरन युक्त पूरक लें*..

■ 6 से 59 माह के बच्चे को हफ्ते में दो बार एक मि० ली० आयरन का सिरप दे
■5 से 9 वर्ष के बच्चे को सप्ताह में एक बार आयरन की एक गुलाबी गोली
■10 से 19 वर्ष तक की उम्र में हफ्ते में एक बार आयरन की नीली गोली
■गर्भवती महिला को गर्भावस्था के चौथे महीने से रोजाना 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली
■धात्री महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली
■कृमि नाश के लिए कीड़े की दवा एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक खाएं
■सभी उम्र के लोगों में अनीमिया की जांच और पहचान किया जाना महत्वपूर्ण होता है ताकि व्यक्ति की हिमोग्लोबिन के स्तर के अनुसार उपयुक्त उपचार प्रारंभ किया जा सके।

*डायरिया का प्रबंधन*.

■ व्यक्तिगत साफ सफाई घर की सफाई आहार की स्वच्छता का ध्यान रखें और डायरिया से बचाव के लिए हमेशा स्वच्छ पानी पियें।
■माताएं 6 माह तक बच्चे को केवल स्तनपान ही कराएं कोई और खाद्य पदार्थ यहां तक पानी भी नहीं दें क्योंकि वह भी बच्चे में डायरिया का कारण बन सकता है।
■डायरिया होने पर भी मां स्तनपान नहीं रुके बल्कि बार-बार स्तनपान करवाएं
■शरीर को दोबारा स्वस्थ बनाने के लिए 6 माह से बड़े बच्चे को उम्र ऊपरी आहार के साथ बार-बार स्तनपान करवाएं
■ बच्चे को डायरिया होने पर तुरंत वह ओ० आर० एस तथा अतिरिक्त तरल पदार्थ दें और जब तक डायरिया पूरी तरह ठीक ना हो जाए तब तक जारी रखें
■डायरिया से पीड़ित बच्चों को 14 दिन तक (6 माह तक के बच्चे को 10 mg एवं 6 माह से 59 माह तक के बच्चे को 20 mg की गोली) जिंक दें अगर दस्त रुक जाए तो भी यह देना बंद नहीं करें

*स्वच्छता और साफ-सफाई का रखें खयाल*

■हमेशा साफ बर्तन में ढक कर रखा हुआ शुद्ध पानी पिए बर्तन को ऊंचे स्थान पर लंबी डंडी वाली टिसनी के साथ रखें
■अपनी स्वच्छता सुनिश्चित करें। हमेशा खाना बनाने स्तनपान से पहले, बच्चे को खिलाने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल के निपटान के बाद साबुन और पानी के से हाथ धोएं।
■बच्चों को खाना खिलाने से पहले बच्चे का हाथों को साबुन और पानी से जरूर धोएं
■शौच के लिए हमेशा शौचालय का उपयोग ही करें
■ किशोरियों और महिलाएं माहवारी के दौरान व्यक्तिगत साफ सफाई का ध्यान रखें

अधिक जानकारी हेतु नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ केंद्र, ANM दीदी, डॉक्टर से संपर्क करें
 

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