झारखंड में राजनीतिक अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है।सब के जड़ में है चुनाव आयोग में खदान लीज मामले को लेकर सुनवाई का पूरा होना।और फिर राजनीतिक सम्भावनाओं के बीच राजनीतिक निर्णय।

ऐसे में चुनाव आयोग के सम्भावित फैसला को लेकर तरह-तरह के कयास लगाया जा ना।सत्ताधारी जेएमएम दल ने भी संभावित फैसले को लेकर भविष्य की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने भी अपने सभी विधायकों को रांची में जमे रहने को कहा है।

20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास पर सत्ताधारी दल की बैठक बुलायी गई है।UPA गठबंधन की इस बैठक में जेएमएम, कांग्रेस और राजद के विधायक शामिल होंगे।

लेकिन अपने तीन झारखंड के विधायकों की बंगाल में गिरफ़्तारी ओर फिर ज़मानत पर रिहा होना के मध्य नजर 
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा है कि सभी विधायकों को रांची में रहने का निर्देश ‘अफवाह’ है।

इस वक्त देश भर में कांग्रेस का महंगाई के खिलाप आंदोलन चल रहा है। झारखंड में भी कांग्रेस के विधायकों को इस बावत अपने – अपने विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम करने का निर्देश दिया गया है। यही वजह है कि लगभग सभी विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में है। 

इसके विपरीत बीजेपी के झारखंड प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव के मुताबिक राज्य की ‘भ्रष्ट सरकार’ की विदाई नजदीक है।उन्हें इस बात का भरोसा है कि चुनाव आयोग के द्वारा खदान लीज मामले में मुख्यमंत्री की सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। 

“सदस्यता रद्द होने के साथ सरकार के अंदर का असंतोष और बढ़ जाएगा. हेमंत सोरेन के लिये बहुमत का आंकड़ा 41 जुटा पाना संभव नहीं होगा”।

यही बातों के वजह से राजनीतिक हलचल है।लेकिन 
अभी वक्त सत्ताधारी जेएमएम बेचैन दिख रही है।

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