*Image credit: IPRD, Jharkhand

माननीया राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कुपोशण, एनीमिया एवं ट्रैफिकिंग झारखण्ड के लिए अत्यन्त गंभीर समस्या है जिसका निदान सभी को सक्रियता से करना होना होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के अनुसूचित जनजातियों, विषेशकर PVTG के लोग इन समस्या से अधिक ग्रसित है। अतः इस दिषा में विषेश ध्यान देने की आवष्यकता है। उन्होंने कहा कि यह चिन्ताजनक है कि देष में पोशण के क्षेत्र में हमारे राज्य की स्थिति अच्छी नहीं है। 5 वर्श से कम आयु के लगभग 50% बच्चे मानक वज़न से कम (न्यून वज़न) के हैं। वे कुपोशण और खून की कमी की गंभीर समस्या से ग्रस्त है। राज्यपाल महोदया आज राज भवन में झारखण्ड राज्य में पोशण की स्थिति की समीक्षा कर रही थी। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव डा0 नितिन कुलकर्णी, समाज कल्याण सचिव श्री अमिताभ कौषल, पोशण मिषन के महानिदेषक श्री डी.के. सक्सेना, एन.एच.एम. के अभियान निदेषक श्री के0एन0 झा, दीपांकर पण्डा, विषेश सचिव, निदेषक, समाज कल्याण विभाग, झारखण्ड प्रमुख, यूनिसेफ श्रीमती मधुलिका जोनाथन सहित कई पदाधिकारीगण उपस्थित थे। 

राज्यपाल महोदया द्वारा उक्त बैठक में निदेषित किया गया कि प्रत्येक जिले के संबंधित अधिकारी जहाँ भी PVTG के लोग हैं, का सर्वेक्षण कर उनका नियमित स्वास्थ्य जाँच करें। पोशण सखी एवं तेजस्विनी जैसी योजनाओं का लाभ PVTG के सदस्यों को मिले, यह सुनिष्चित हो। उनके द्वारा बैठक में बाल विकास परियोजना योजनान्तर्गत पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) इत्यादि के रिक्त पदों पर नियुक्ति करने हेतु भी निदेषित किया गया ताकि बच्चों एवं महिलाओं पर और समुचित ध्यान दिया जा सके।

बैठक में सचिव, समाज कल्याण विभाग अमिताभ कौषल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जन-वितरण प्रणाली के तहत लाभुकों को चावल प्रदान किया जा रहा है तथा षहरी क्षेत्रों में चावल के साथ गेहूँ भी दिया जा रहा है। उन्होंने राज्यपाल महोदया को जानकारी दी कि जन-वितरण प्रणाली के तहत दाल भी दिये जाने का प्रस्ताव है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने 

वाले लोग गेहूँ की भी माँग कर रहे हैं, इसे दृश्टि में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लाभुक परिवारों को भी गेहूँ भी दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आँगनबाड़ी केन्द्रों द्वारा सप्ताह में 3 दिन अंडा बच्चों को देना प्रारंभ कर दिया गया है। विदित हो कि मध्याह्न भोजन के तहत अंडा पूर्व से ही दिया जाता था। उनके द्वारा राज्यपाल महोदया को यह भी अवगत कराया गया कि पोशण मिषन के द्वारा आँगनबाड़ी केन्द्रों के सेविका-सहायिका का प्रषिक्षण राज्य के 6 जिलों में आयोजित किया जा रहा है। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य 14 जिलों में इसे षीघ्र ही प्रारम्भ किया जायेगा। राज्यपाल महोदया को यह भी जानकारी दी गई कि समेकित बाल विकास योजना में 340 पर्यवेक्षक के पद रिक्त है, इन पदों पर नियुक्ति हेतु झारखण्ड राज्य कर्मचारी चयन आयोग को अधियााचना भेजी गई है।     

इस अवसर पर यूनिसेफ की मधुलिका ने कहा कि कुपोशण की समस्या राज्य में सामान्य से अनुसूचित जनजाति में 15% अधिक है एवं अनुसूचित जाति में 10ः अधिक है।   
 

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