पहले झारखण्ड के अधिकतर किसान मानसून के दौरान ही खेती करते थे और इसके बाद आजीविका की तलाश में राज्य या देश के अन्य हिस्सों में रोजगार की तलाश में पलायन कर जाते थे। लेकिन, ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली की स्थापना के साथ पलायन दर भी कम हो गई है और किसान साल में कई फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। 

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 परिवार योजना से हो रहे हैं लाभान्वित

इस परियोजना की निगरानी और क्रियान्वयन राज्य सरकार की देखरेख में एटीएमए, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी द्वारा की गई, जो नवीनतम तकनीक को अपनाने के साथ कृषि को बढ़ावा देती है। परियोजना अक्टूबर 2020 में शुरू की गई थी। सिर्फ सिमडेगा में 105 से अधिक सौर-आधारित लिफ्ट सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे सिमडेगा के पांच हजार परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

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*ग्राम सभा से सिंचाई सुविधा का जाना हाल, फिर शुरू की परियोजना

राज्य के किसान ज्यादातर मानसून के दौरान ही प्रमुख रूप से सक्रिय रहते थे। सरकार ने समस्या का पता लगाने के लिए गहनता से काम किया। राज्यभर में हुई ग्राम सभा के बाद यह स्पष्ट हो गया कि किसान सिंचाई सुविधा की कमी के कारण धान के अलावा किसी अन्य फसल का उत्पादन करने में असमर्थ हैं। 

इसके बाद परियोजना को घरातल पर उतारा गया। जिला आत्मा प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री कृष्ण बिहारी का कहना है कि अब किसानों ने सौर आधारित लिफ्ट सिंचाई प्रणाली की मदद से साल में दो से तीन फसलों की खेती शुरू कर दी है। इससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि हुई है और यह पलायन को रोकने में भी मदद कर रहा है।

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