राज्यपाल के निर्णय का झारखंड शराब व्यापारी संघ ने स्वागत किया है. संघ के सचिव सुबोध कुमार जयसवाल ने कहा है कि आज जो झारखंड राज्य को वितिय घाटा हुवा है,जो स्थिति उत्पन्न हुई है वो हेमंत सोरेन सरकार के सोची-समझी प्लान के तहत की गई है ओर इसके चलते उत्पाद राजस्व में भारी कमी हुई है. 

राज्यपाल रमेश बैस ने अपना सही निर्णय लेकर उत्पाद संशोधन बिल प्रस्ताव की गड़बड़ी का पर्दाफाश किया है. उन्होंने कहा है कि यह संशोधन बिल लाया गया tha सिर्फ “छत्तीसगढ़ के मेहमानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए”.नीचे के कर्मचारी जो गरीब कर्मचारी है,दुकान में उसके ऊपर दंडित करना यह प्रावधान कहां से सही है.यह बिल्कुल गलत है.

झारखंड शराब व्यापारी संघ की ओर से कहा गया है कि 20 लीटर तक का शराब अपने पास रखने का प्रस्ताव लाया गया था.तब तो कोई भी आदमी कहीं अवैध शराब रख सकता है.यह भी नियम गलत है.

सरकार ने संशोधन बिल लाया जिसका राजभवन ने विरोध किया है. दंड का तो प्रावधान होना ही चाहिए. छत्तीसगढ़ के एजेंसी प्लेसमेंट मेहमानों पर जो एजेंसी लेकर के दुकान संचालित कर रहे हैं उत्पाद नीति 2022 सिर्फ और सिर्फ एजेंसी और सरकार के अपना फायदा के लिए लाया गया है.

स्थानीय कर्मचारी ही दोषी पाए जाएं और बाहर के जो छत्तीसगढ़ के मेहमान हैं. सिर्फ़ उनको संवैधानिक संरक्षण देने का प्रयास के लिए नीति लाया गया था.

जबकि 5% हम लोग को टाइम से पहले प्रतिदिन प्लेंटी लगाया जाता रहा है.अभी उत्पाद राजस्व गिर गया है फिर भी प्लेसमेंट एजेंसियों पर प्रतिदिन क्यों नहीं प्लांटी लगाया जाता है ?अभी तक कोई प्लांटी का प्रावधान उन लोगों पर नहीं किया गया है? राज्य सरकार का प्लेसमेंट एजेंसी को संरक्षण प्राप्त है.

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