पत्र सूचना कार्यालय, रीजनल आउटरीच ब्यूरो, रांची और फील्ड आउटरीच ब्यूरो, दुमका के संयुक्त तत्वावधान में 'शिक्षा स्वास्थ्य और स्वच्छता' विषय पर आज दिनांक 21 जनवरी 2020, बुधवार को वेबिनार परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में उपर्युक्त विषय पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। 

शिक्षा से स्वच्छता आती है और स्वच्छता से स्वास्थ्य ठीक रहता है। यह केंद्र सरकार का सराहनीय कदम है कि नई शिक्षा नीति-2020 में स्वच्छता को भी शामिल किया गया है। स्वच्छ माहौल में ग्रहण की गई शिक्षा बुद्धिमत्ता को बढ़ाती है। स्वच्छता के लिए हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से काफी सराहनीय प्रयास किए गए हैं। स्वच्छता अब जनआंदोलन बन गई है। वैश्विक महामारी कोविड के दौरान पहले से अपनाए गए स्वच्छता से संबंधित प्रयासों के कारण इस महामारी का असर काफी कम रहा।

वेबिनार परिचर्चा की शुरुआत करते हुए अपर महानिदेशक पीआईबी- आरओबी, रांची श्री अरिमर्दन सिंह ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता तीनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरु किया गया स्वच्छता अभियान जन आंदोलन बन गया है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारा घर तो साफ हो ही साथ-साथ पास पड़ोस में भी गंदगी न फैले। कचरा निस्तारण करते वक्त हमें यह भी देखना चाहिए क्या उस कचरे का उपयोग दूसरे कार्यों में किया जा सकता है। स्वच्छता का मतलब हमारे साथ हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित हो।

परिचर्चा को संबोधित करते हुए टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय के फारसी संकाय के सह प्राध्यापक डा. हलीम अख्तर ने कहा कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी में एक अच्छी बात यह भी है कि इसमें स्वच्छता को भी शामिल किया गया है। स्वच्छता सेहत और जेहन की जरूरत है, स्वच्छ मन में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। डा. हलीम ने सुझाव देते हुए कहा कि स्पोर्ट्स एजुकेशन को भी अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। वैश्विक महामारी कोविड की चुनौतियों का सामना करने में स्वच्छता ने बड़ी भूमिका निभाई है। हमारे सभी महापुरुषों ने अपनी किताबों या वक्तव्यों में स्वच्छता की बात कही है। हमें स्वच्छता की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए जिससे कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बन सकें।
 

रामगढ़ कॉलेज के प्रचार्य डा. मिथिलेश कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर में शहरीकरण का है, लेकिन हमें शहरीकरण के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखना आवश्यक है। भूमिगत जल के दोहन के साथ-साथ में उसके संचयन पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। हर भवन के निर्माण के दौरान ही वाटर हार्वेस्टिंग युनिट का निर्माण होना चाहिए। बच्चों को प्राथमिक शिक्षा में भी स्वच्छता, जल संचयन को लेकर जागरुक किए जाने की जरूरत है। झारखंड के लोग प्रकृति की पूजा करते हैं, यहां पेड़ काटने से पहले हाथ जोड़कर क्षमा मांगी जाती है और दूसरा पेड़ लगाने की शपथ ली जाती है। ऐसी ही प्रवृत्ति पूरे देश को अपनानी होगी।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग दुमका के कार्यपालक अभियंता श्री मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वच्छता ही स्वर्ग है, स्वच्छता से ही हम प्रभुत्व की ओर पहुंच सकते हैं। स्वच्छता के लिए शिक्षा जरूरी है और स्वच्छता से व्यक्ति अच्छा स्वास्थ्य पाता है। पेयजल को संजोना हर नागरिक का दायित्व होना चाहिए। भविष्य में पेयजल की किल्लत न हो इसके लिए घरों से बहने वाले पानी का उचित संरक्षण जरूरी है। मल-मूत्रों का भी सुरिक्षत निपटान किया जाना जरूरी है।

एएमयू अलीगढ़ की सहायक प्राध्यापक डा. सना सरीन ने कहा कि स्वच्छ परिवेश का असर शिक्षा पर भी पड़ता है। सामाजिक और व्यावहारिक परिवर्तन लाने के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। नई शिक्षा नीति में शारीरिक और मानसिक विकास पर काफी ध्यान दिया गया है। मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों का समुचित विकास हो सकेगा। फिजिकल फिटनेस पर फोकस, एनिमेटेड मूवीज/कार्टून के जरिए बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा भी न्यू एजुकेशन पॉलिसी की प्रमुख विशेषताएं हैं। इनके जरिए बच्चों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति भी जिम्मेदार बनाया जाएगा।

वेबिनार के दौरान उपर्युक्त विषय से संबंधित ऑनलाइन क्विज में भी प्रतिभागियों ने शिरकत की। क्विज में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित 10 सवाल पूछे गए थे। वेबिनार का समन्वय एवं संचालन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री शाहिद रहमान ने किया।

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