केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने 29 AUG के दिन  नई दिल्लीमें 'सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन' के एक हिस्से के रूपमें 'जागरूकता अभियान और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण' कीशुरुआत की थी। ये मुद्दा आदिवासी समाज और पूरे मनोव जाती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

जो भी हो उस कार्यक्रम में जमीनी स्तर के पदाधिकारियों केप्रशिक्षण की परिकल्पना की गई है ताकि जनता के बीच, विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में इस दिशा में जागरूकता पैदा कीजा सके।

हाल ही की एक घोषणा में, सरकार ने 2023-24 के बजट में 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के लिए एकमिशन की घोषणा की। इस मिशन में जागरूकता सृजन, प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 0-40 वर्ष के आयु वर्ग के 7 करोड़लोगों की जांच और केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों केसहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से परामर्श शामिल होगा।मिशन को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई, 2023 को मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में लॉन्च कियागया था।

लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए, श्री अर्जुन मुंडा ने कहाकि यह पहल सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करकेप्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सिकल सेल रोग मुक्त भारत केदृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी। श्री मुंडा ने कहा कि उनकेप्रेरणादायक नेतृत्व में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण औरजनजातीय कार्य मंत्रालय सिकल सेल रोग उन्मूलन मिशन केलिए जागरूकता सृजन पहल शुरू करने के लिए सहयोग कररहे हैं।

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श्री अर्जुन मुंडा ने इस पहल को सफल बनाने में चुनौतियों औरअवसरों की भी पहचान की। उन्होंने कहा कि बुनियादी चुनौतीजनभागीदारी सुनिश्चित करके मिशन को जमीनी स्तर काआंदोलन बनाना होगा।सके लिए जनता के बीच गलतधारणाओं का मुकाबला करने और बीमारी को खत्म करने केलिए वास्तव में सहभागी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने केलिए उन्हें साथ लाने की आवश्यकता होगी।श्री मुंडा ने प्रभावितआबादी का स्वास्थ्य देखभाल डेटाबेस बनाने के महत्व पर जोरदिया, जो अनुसंधान और स्थायी समाधान खोजने में मददकरेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर ही इस बीमारी केसंक्रमण को रोकना और आने वाली पीढ़ियों को बचाना संभवहोगा।

श्री मुंडा ने राज्य स्तर पर मास्टर प्रशिक्षकों के रूप में बड़ीसंख्या में तृतीयक देखभाल चिकित्सकों को नामित करने मेंराज्य सरकारों की प्रतिक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त की।चिकित्सा पेशेवर बीमारी के बारे में गलत सूचना को रोकने औरइसे खत्म करने के साथ-साथ बीमारी, इसके लक्षणों औरइसकी पीड़ा की समझ को बढ़ावा देने के लिए जनजातीयसमुदायों के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा किपरिणामस्वरूप, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जागरूकता बढ़ानेऔर हितधारकों की काउंसलिंग पर एक मॉड्यूल प्रकाशितकरने के लिए चिकित्सा पेशेवरों, रोगी सहायता संगठनों औरअन्य हितधारकों सहित विशेषज्ञों की एक समिति का गठनकिया है। उन्होंने कहा कि ये मॉड्यूल मिशन के लॉन्च इवेंट मेंजारी किए गए थे।

श्री मुंडा ने बताया कि जागरूकता सृजन की विशाल पहल कीजा रही है और अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए विभिन्न स्तरोंपर प्रशिक्षण मॉड्यूल की योजना बनाई जा रही है।श्री मुंडा नेबताया कि सामुदायिक स्तर पर नेताओं को शामिल करने कीयोजना बनाई गई है जो मिशन में जनता की व्यापक भागीदारीसुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि एक अभूतपूर्व कदमउठाते हुए, जागरूकता अभियानों का जनजातीय भाषाओं मेंअनुवाद किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर संदेश काव्यापक विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर बोलते हुए, सचिव (जनजातीय कार्य) श्री अनिलकुमार झा ने बताया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगनैदानिक ​​​​परीक्षण के लिए हमसे संपर्क करने के लिए पर्याप्तरूप से प्रेरित हों, हम राज्य, जिला और ग्राम स्तर पर तीन-स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों ने तृतीयक देखभाल चिकित्सकों को राज्य स्तरपर मास्टर प्रशिक्षकों के रूप में नामित किया है। साथ ही, जिला स्तर के प्रशिक्षक स्थानीय प्रभावशाली लोगों और रायदेने वालों को प्रशिक्षित करेंगे।

अपर सचिव सुश्री आर जया ने कहा कि यह आयोजनजागरूकता अभियान की शुरुआत का प्रतीक है। इसकेअलावा, उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस क्षेत्र के सभी हितधारकोंके साथ जुड़ रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके किमिशन एक जन आंदोलन बन जाए। उन्होंने मास्टर प्रशिक्षकों सेयह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि वे प्रशिक्षण कोआगे बढ़ाएं और जिला-स्तरीय मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षितकरें जो संदेश को स्थानीय-ग्रामीण स्तर तक ले जाएंगे। अंतिमछोर तक पहुंचने के लिए सभी स्तरों पर सभी हितधारकों कोशामिल करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, मंत्रालयजागरूकता बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय कार्यशालाएं और प्रचारअभियान चलाने और स्वास्थ्य और सिकल सेल कॉर्नर जैसेऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करने का भी इरादा रखता है।

इन विषयों पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए (i) 'जागरूकता मॉड्यूल और निवारक उपाय के रूप में इसकामहत्व' पर सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. दीप्ति जैन, नागपुर मेडिकलकॉलेज, महाराष्ट्र और समिति की अध्यक्ष द्वारा; (ii) 'सिकलसेल में निदान महत्वपूर्ण है' पर डॉ. अनुपम सचदेवा, विभागाध्यक्ष, बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजी और ऑन्कोलॉजी, सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली द्वारा और (iii) 'सिकल सेल कीरोकथाम और प्रबंधन में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका' परडॉ. नीता राधाकृष्णन, एसोसिएट प्रोफेसर, एसएसपीजीआई, नोएडा द्वारा।

इस अवसर पर द इंटरनेशनल पीडियाट्रिक एसोसिएशन (आईपीए) के अध्यक्ष डॉ. नवीन ठाकर, एम्स देवघर के निदेशकडॉ. सौरभ वार्ष्णेय, अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों, विभिन्नहितधारकों और सभी समिति सदस्यों ने अपने विचार साझाकिए।

श्री असित गोपाल, आयुक्त-एनईएसटीएस; डॉ. नवल जीतकपूर, संयुक्त सचिव; श्री विश्वजीत दास, डीडीजी, श्रीमतीविनीता श्रीवास्तव, स्वास्थ्य सलाहकार और जनजातीय कार्यमंत्रालय के अन्य अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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